श्री कृष्ण जन्म की कथा सुनकर भावविभोर हुए श्रद्धालु

अवतार के तीन भेद किए गए हैं जन्म, समागम और प्राकट्य। शरीर का जन्म होता है, आत्मा और शरीर का समागम होता है, ईश्वर का केवल प्राकट्य होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्तों का उद्धार व पृथ्वी को दैत्य शक्तियों से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था। जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। यह सद्विचार कथा व्यास राम सजीवन शास्त्री जी महाराज ने हरैया नगर पंचायत स्थित सिसई गाँव में शुक्रवार को श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन व्यक्त किया। महाराज ने कहा कि भगवान हमेशा अपने भक्तों का ध्यान रखते हैं। उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर पाप, अनाचार बढ़ता है, तब-तब भगवान श्रीहरि धरा पर किसी न किसी रूप में अवतार लेकर भक्तों के संकट को हरते हैं। जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। कथा के दौरान शास्त्री जी ने तमाम गीतों के माध्यम से श्रीकृष्ण जन्म का वर्णन किया और साथ ही निकाली गई झांकी ने दर्शकों का मन मोह लिया सभी श्रद्धालु झूम उठे।
इस अवसर पर रामनयन पाण्डेय, रामकुमार पाण्डेय, मनोज पाण्डेय, अखिलेश पाण्डेय, अश्विनी, अमित, समीर, अभिनय, सक्षम, अंबरीश, अनंत, भूपेंद्र, अनुराग, आदर्श, हर्ष सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

शक्ति शरण उपाध्याय

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