ईश्वरीय वाणी वेद -आचार्य सुरेश जोशी

🍃 *ओ३म्*🍃
🌱 ईश्वरीय वाणी वेद 🌱
*ओ३म् अग्ने नय सुपथा राये अस्मान विश्वानि देव वयुनानि विद्वान् ।युयोध्यस्मजुहुराणमेनो भूयिष्ठां ते नम उक्तिं विधेम्।।*
🌸 *मंत्र का अर्थ*🌸
[ देव अग्ने ] हे सबके नायक या पथ-प्रदर्शक भगवन्! आप [ विश्वानि ] सब [ वयुयानि ] ज्ञानों को [ विद्वान ] जानने वाले हैं। इसलिए हम [ ते ] आपकी [ भूयिष्ठाम् ] बहुत -बहुत [ नम -उक्तिम् विधेम ] स्तुति करते हैं। आप [ राये ] धन -सम्पत्ति के लिए [ अस्मान् ] हमको [ सुपथा ] ठीक मार्ग से [ नय ] ले चलिए । [ अस्मत ] हमसे [ जुहुराणम् ] कुटिल [ एन: ] पाप को [ युयोधि ] दूर कीजिए।
🏵️ *मंत्र की मीमांसा*🏵️
मंत्र में परमात्मा को *अग्नि* नाम से संबोधित किया है।यह परमात्मा का *गुण वाची* नाम है। ईश्वर से प्रार्थना की गई है कि हे प्रभु! आप सबके नायक या पथ-प्रदर्शक हैं और हमें *सुप्त की ओर ले चलो तथा कुपथ से छुड़ाओ*
लोकभाषा में *अग्नि आग* को कहते हैं। आग से भी प्रकाश होता है और प्रकाश मार्ग प्रदर्शन करता है।अंधरे में कोई नहीं चल सकता है।घन -घोर जंगल में भी अंधेरे में जुगनू का प्रकाश मार्ग प्रदर्शन करता है। *सूर्य आग का सबसे बड़ा गोला* है। सूर्य के सामने दूसरी वस्तु भौतिक अर्थ में *पथ प्रदर्शक* है ही नहीं।
अब यहां मंत्र में जो अग्नि परमेश्वर के लिए कहा है वह *आध्यात्मिक वा ज्ञान के प्रकाश* के लिए। परमेश्वर जब अपनी कृपा से हमारी बुद्धियों को प्रकाश मान कर देता है तो हमारा *अधंकार* नष्ट अर्थात् हमारी *अविद्या का नाश और विद्या का प्रकाश* हो जाता है।
अतः ईश्वर से भक्त प्रार्थना कर रहा है।
*हे जग के प्रकाश के स्वामी,जब सब जग दमका देना।*
*मेरे भी जीवन के पथ पर कुछ किरणें चमका देना ।।*
आचार्य सुरेश जोशी
*वैदिक प्रवक्ता*

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