नई कविता – दीप्ति त्रिपाठी

चन्दा मामा थे कोहरे में,

अब भी कोहरा छाया है।

सूरज दिखा नहीं दो दिन से,

फूल-फूल मुरझाया है।

सुखद ये सर्द हवाएं भी हैं,

शुभ सन्देश जो लाती हैं।

दूर देश बैठे अपनों को,

मन का हाल सुनाती हैं।।

दीप्ति त्रिपाठी

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