नई गीत की प्रस्तुति – अंजना सिन्हा

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अपना सब कुछ भूल तुम्हीं से,

जिस नारी ने प्यार किया। 

शर्म करो इंसान उसी पर,तुमने अत्याचार किया।।

साथ निभाने का वादा कर,तुमने उसे भुलाया है।

लाज न आई उसे मौत की,गहरी नींद सुलाया है।।

मात्र चंद सिक्कों के खातिर,उस पर घातक वार किया.. 

शर्म करो इंसान उसी पर,तुमने अत्याचार किया।

ममता रोती रही बिलख कर,

नैतिकता दम तोड़ गई। 

अग्नि कुंड में जलती बेटी,प्रश्न झुलसते छोड़ गई।।

मातु दूध को किया कलंकित,

मानवपन शर्मसार किया..

शर्म करो इंसान उसी पर,तुमने अत्याचार किया।

घर की शान नारियाँ होतीं,यह तुम कहते थके नहीं। 

उसके मन-अरमान हृदय की,

पीर समझ ही सके नहीं।।

जला दिया बेटी को जिसने,तन मन सभी निसार किया..

शर्म करो इंसान उसी पर,तुमने अत्याचार किया।

बहुत सह लिया उत्पीड़न अब,

हिम्मत यही दिखानी है।

नारी नर में फर्क करे वह,हर दीवार गिरानी है।।

न्याय हेतु आह्वान यही पितु, माता ने हर बार किया ..

शर्म करो इंसान उसी पर,तुमने अत्याचार किया।

जग के ठेकेदारो मति क्यों,आज तुम्हारी सोई है।

न्याय दिलाओ उस बेटी को,जार जार जो रोई है।।

फाँसी दो जिसने जुल्मों से,नारी को बेजार किया… 

शर्म करो इंसान उसी पर,तुमने अत्याचार किया।।

अंजना सिन्हा “सखी “

 रायगढ़

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