अनुराग लक्ष्य, 15 जनवरी
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुम्बई संवाददाता ।
,,,, वोह शम्स ओ क़मर वक्त की रफ्तार था लोगों
हर दिल की धड़कनों का वही प्यार था लोगों
आने जिसके होती थी महफ़िल में रोशनी
हिंदोस्तां का ऐसा वोह फनकार था लोगों,,,,
जी हां, अफसोस सद अफसोस, मशहूर ओ मारूफ शायर मुनव्वर राना अब हमारे बीच नहीं रहे। उर्दू अदब का एक बेहतरीन शायर मुनव्वर राना को हमने खो दिया जो हिंदुस्तानी मुशायरों की जान हुआ कटते थे ।
मुनव्वर राना काफी लंबे समय से अ सोवस्थ चल रहे थे, जिसकी वजह मुशायरों में भी उनकी शिरकत नहीं हो पा रही थी।
हिंदुस्तान के बेहतरीन शायरों में जब भी उनकी बात होगी तो उन्हें मां के ऊपर कहने वाले बेहतरीन शायरों में याद किया
जाएगा।