राम कथा सुनने मात्र से कष्टों का होता है निवारण: साध्वी नीलम
रिपोर्टर शक्ति शरण उपाध्याय
बस्ती। जनपद के हरैया क्षेत्र अंतर्गत महराजगंज नारायणपुर तिवारी स्थित हनुमान मंदिर में आयोजित सीताराम महायज्ञ एवं श्रीराम कथा के तीसरे दिन अंतर्राष्ट्रीय कथावाचिका साध्वी नीलम ने भगवान श्रीराम की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान की कथा अमृत के समान जीवनदायिनी है, जिसे सुनने मात्र से मनुष्य के तमाम कष्टों का निवारण हो जाता है।
साध्वी नीलम ने कथा के दौरान भगवान शिव और माता सती से जुड़ा प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान शिव स्वयं श्रीराम की कथा सुनने के लिए अत्यंत उत्सुक रहते हैं। वे माता सती के साथ पृथ्वी पर एक ऋषि के आश्रम पहुंचे, जहां रामकथा का दिव्य सत्संग चल रहा था। भगवान शिव अत्यंत श्रद्धा और प्रेम से कथा श्रवण करने लगे, क्योंकि वे श्रीराम को परब्रह्म मानते हैं।उन्होंने बताया कि कथा सुनते समय माता सती के मन में संदेह उत्पन्न हुआ कि जो स्वयं भगवान हैं, वे मनुष्य रूप में दुःख क्यों भोग रहे हैं और माता सीता के वियोग में व्याकुल क्यों हैं। इस संशय को दूर करने के लिए सती ने माता सीता का रूप धारण कर भगवान राम की परीक्षा ली। लेकिन श्रीराम ने तुरंत उन्हें पहचान लिया और “माता” कहकर संबोधित किया, जिससे सती लज्जित हो गईं।
साध्वी नीलम ने आगे बताया कि जब सती वापस भगवान शिव के पास पहुंचीं तो उन्होंने सत्य छुपा लिया, लेकिन भगवान शिव सब जान गए। इस घटना के बाद उन्होंने मन ही मन सती से वैराग्य धारण कर लिया, क्योंकि सती ने माता सीता का रूप धारण किया था।कथा के दौरान सती चरित्र का विस्तृत वर्णन करते हुए साध्वी नीलम ने बताया कि सती दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं और बचपन से ही भगवान शिव की परम भक्त थीं। उन्होंने कठोर तपस्या कर शिव को पति रूप में प्राप्त किया। लेकिन दक्ष प्रजापति द्वारा आयोजित यज्ञ में शिव का अपमान सहन न कर पाने के कारण सती ने यज्ञ अग्नि में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए। इस घटना से क्रोधित होकर भगवान शिव ने यज्ञ का विनाश कर दिया।साध्वी नीलम ने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि सती को इतना कष्ट इसलिए सहना पड़ा क्योंकि उन्होंने भगवान श्रीराम की लीला पर संदेह किया और उनकी परीक्षा लेने का प्रयास किया। इसलिए हमें सदैव भगवान की भक्ति में अटूट विश्वास रखना चाहिए।
इस अवसर पर महाराजगंज पुलिस चौकी इंचार्ज अनिल त्रिपाठी यज्ञाचार्य धर्मदास शास्त्री, भक्ति गायिका गौरी पांडेय, विद्वान दीपक शास्त्री, सज्जन शास्त्री सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।