खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार सृजन का सशक्त माध्यम: केशव प्रसाद मौर्य

लखनऊ,  उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने तथा युवाओं के लिए व्यापक रोजगार सृजन का सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अंतर्गत उपलब्ध सुविधाओं, अनुदानों और प्रावधानों के बारे में व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता सुनिश्चित की जाए, ताकि अधिकाधिक उद्यम स्थापित हो सकें।उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर किसानों के उत्पादों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। विकसित भारत के निर्माण में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और इस दिशा में विभाग द्वारा प्रभावी कदम तेजी से उठाए जा रहे हैं।इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण बी. एल. मीणा की अध्यक्षता में शुक्रवार को खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय, लखनऊ में अप्रेज़ल समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्री-अप्रेज़ल समिति द्वारा संस्तुत 14 नवीन तथा एक पूर्व में स्थगित प्रस्ताव सहित कुल 15 प्रस्ताव विचारार्थ प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 13 प्रस्तावों को राज्य स्तरीय समिति के समक्ष अनुमोदन के लिए संस्तुति प्रदान की गई।स्वीकृति के लिए संस्तुत प्रमुख इकाइयों में बिस्कुट एवं टॉफी हेतु स्टार्च इकाई, मैकरोनी, पास्ता एवं नूडल्स निर्माण इकाई, पोल्ट्री फीड यूनिट, चिकोरी पाउडर एवं एक्सट्रैक्ट इकाई, डेयरी उत्पाद विस्तार, सोलर पावर प्लांट, बेकरी उत्पाद इकाई, मॉरिंगा उत्पाद निर्माण तथा तिलहन एवं दाल प्रसंस्करण इकाइयाँ शामिल हैं।अप्रेज़ल समिति द्वारा निर्देशित किया गया कि कच्चे माल की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर स्थानीय कृषकों एवं दुग्ध उत्पादकों से सुनिश्चित की जाए। संबंधित इकाइयों को प्लान मैप, अग्निशमन तथा प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त करना अनिवार्य होगा। जहां लागू हो, वहां 100 स्थानीय कृषकों या उत्पादकों से कच्चा माल आपूर्ति की सूची स्टाम्प पेपर पर उपलब्ध करानी होगी। कार्यरत इकाइयों को 85 प्रतिशत उत्पादन क्षमता उपयोग का प्रमाण तथा विगत दो वर्षों के आयकर एवं जीएसटी रिटर्न की प्रमाणित प्रतियां प्रस्तुत करनी होंगी।बैठक में खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023 के अंतर्गत चिन्हित कार्यक्षेत्रों के पुनर्संरचना और संशोधन पर भी विचार किया गया। इसमें फल एवं सब्जी प्रसंस्करण, रेडी-टू-ईट एवं रेडी-टू-कुक उत्पाद, मसाला, सोयाबीन, मशरूम, शहद प्रसंस्करण, कोको उत्पाद, गुड़ आधारित मूल्य संवर्धित उत्पाद, फ्रूट जूस एवं कार्बोनेटेड पेय पदार्थ तथा पशु, मुर्गी एवं मत्स्य चारा निर्माण इकाइयों को सम्मिलित किए जाने की संस्तुति की गई।अपर मुख्य सचिव बी. एल. मीणा ने बताया कि कॉर्पोरेट क्षेत्र से सेवानिवृत्त पेशेवर, प्रबंधन डिग्री या डिप्लोमा धारक, इंजीनियर तथा विदेशों से अध्ययन कर लौटे युवा उद्यमियों का रुझान प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अंतर्गत उद्यम स्थापना की ओर तेजी से बढ़ रहा है।अप्रेज़ल समिति के समक्ष जनपद अमेठी से मेसर्स एफिकनो फिनटेक कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्टार्च उत्पादन परियोजना प्रस्तुत की गई, जिसका उपयोग बिस्कुट एवं टॉफी निर्माण में किया जाएगा। परियोजना के आवेदक इंजीनियर एस. के. तिवारी ने अपने 42 वर्षों के अनुभव के आधार पर परियोजना की उपयोगिता और संभावनाओं को प्रस्तुत किया। इसी प्रकार जनपद बुलंदशहर से मेसर्स शाकुंभरी ऑर्गेनिक एक्जिम एलएलपी द्वारा तिल, मूंगफली, गेहूं एवं दालों के प्रसंस्करण, ग्रेडिंग और पैकेजिंग से संबंधित परियोजना प्रस्तुत की गई, जिसमें मूल्य संवर्धन और निर्यात की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया।
अप्रेज़ल समिति ने प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने, स्थानीय किसानों की आय में वृद्धि और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।