आज से लगभग 301 वर्ष पूर्व ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन अहिल्याबाई होल्करजी का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के ग्राम चौड़ी में हुआ था
वह मा अन्नपूर्णा की साक्षात् अवतार थी
तथा उन्होंने अपने राज्य में विधवा विवाह को प्रोत्साहित किया था
तथा सती प्रथा को अपने राज्य में प्रतिबंधित कर दिया था
आज हमें ऐसे महारानी जी को नमन करते है
*डॉ मुरली धर सिंह शास्त्री *
*अधिवक्ता *
मा उच्च न्यायालय इलाहाबाद लखनऊ पीठ
पूर्व उप निदेशक
मुख्यमंत्री मीडिया सेंटर लोकभवन
अयोध्या धाम तथा काशी धाम
+ 30 में 2026 काशी धाम से+
आज से 301 वर्ष पूर्व महारानी अहिल्याबाई होलकर के जन्म 31मई को हुआ था और इस बार भी ज्येष्ठ पूर्णिमा है
कोई भी महापुरुष पूर्णिमा के दिन ही पैदा होता है
महारानी अपने देवी तुल्य शासन के लिए माँ अन्नपूर्णा के रूप में याद की जाती है
आपका योगदान आधुनिक भारत के काशी काशी विश्वनाथ ओंकारेश्वर महाकालेश्वर गदाधर मंदिर गया सोमनाथ मंदिर सोमनाथ के निर्माण अनेको मंदिर के निर्माण में
महारानी को हम उनकी जयंती पर नमन करते हैं और सबसे आशीर्वाद किया आकांक्षा रखते हैं
इतिहास में अनेक राजा और रानी हुए लेकिन महारानी अहिल्याबाई होल्कर की तरह कोई नहीं हुआ इसका कारण था बचपन में शादी होना शादी के बाद लड़का होना उसका भी स्वर्गवास होना और पति का बीमारी के बाद निधन होना पति के एवं ससुर के निधन के बाद वर्ष 17 67 में महारानी मालवा की राजा रानी के रूप में कार्यभार ग्रहण किया और इस पद पर 1795 तक रही
.महारानी अपना सभी राजभर भगवान शंकर के नाम से संचालित करती थी तथा उनकी सुमरनी झोली में शंकर जी एवं रुद्राक्ष की माला में रहती थी,,महारानी में ही इसी से अपने राज्य को संचालित किया तथा उनके राज्य में महारानी के नाम का मोहर नहीं लगता था भगवान शंकर के नाम का ही मोहर लगता था
महारानी ने शंकर जी पर ही अपने राज्य राजधानी का नाम महेश्वर रखा जो हर मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में नर्मदा के उत्तर तट पर बसा हुआ है
जो एक आधुनिक शहर भी है तथा अपने स्थापित स्थापत्य कला की दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है
महारानी का पूरा राजपाठ भगवान शंकर के संचालित करते थे
यदि महारानी नहीं होती तो सोमनाथ मंदिर नहीं बना होता काशी विश्वनाथ मंदिर नहीं बना होता ओंकारेश्वर मंदिर नहीं बना होता है महाकालेश्वर मंदिर नहीं बना होता त्रंबकेश्वर मंदिर नहीं बना होता है भीमाशंकर मंदिर नहीं बना होता गणेश्वर मंदिर नहीं बना होता तथा गया जी का प्रसिद्ध स्थान गदाधर मंदिर भी नहीं बना होता इन्होंने काशी के विश्वनाथ मंदिर के निर्माण में सोमनाथ के मंदिर के निर्माण में महाकालेश्वर के निर्माण में पूरी शासकीय क्षमता का प्रयोग किया था उसे समय के राजा महाराजा या लगभग 300 साल तक के पूर्व देखा जाए कोई भी राजा या महारानी कोई सरकार नहीं किया महारानी जी काम को करती थी
बड़े क्षमता के साथ एवं अंतःकरण के साथ करती थी
उनका पूर्ण जीवन में सफलता पर लेकिन उनका एक कोना हमेशा खूबसुन रहा अपनी संतान शासन नहीं कर सकी तथा उन्होंने गोद लेने से भी इनकार कर दिया और शासन को योग्यता किया आधार पर उसे समय के योग्य शासन संचालित करने वाले लोगों को सौंप दिया
आजकल के नेता अपने योग्य संतान न होने पर आरोग्य संतान को भी सत्ता सौंप देते हैं
यह एक लोकतंत्र का मजाक महारानी से उनको शिक्षा लेनी चाहिए
जो धार्मिक नाटक करते हैं बंद करना चाहिए
महारानी की जयंती पर हम उनको नमन करते हैं महारानी मुझे आशीर्वाद दें और मुझे सौभाग्य मिला है उनके द्वारा निर्मित सभी स्थानों को अपने परिवार के साथ भ्रमण किया तथा आज 300 वर्ष समाप्त गुजर गए हैं लेकिन महारानी जैसा कोई ना तो महारानी हुआ न कोई राजा हुआ मा अन्नपूर्णा जी के साक्षात अवतार थी उनकी तीव्रता को देखकर उस समय के राजा महाराजा तत्काल नमन करते ह थे और उनके लिए अलग आसान तैयार किया जाता था
जिस पर महारानी विराजमान होती थी
आज हम केंद्रीय सरकार से राज्य सरकारों से मांग करते
उनके कृतित्व के संरक्षण हेतु विशेष कार्य किया जाए उनके द्वारा निर्मित स्थान को
सुरक्षित किया जाए तथा काशी के निर्माण जो हो रहे हैं
उसमें महारानी के योगदान को और रेखांकित किया जाए
जय हिंद जय भारत जय सनातन धर्म