लखनऊ, ।मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में शिक्षामित्रों एवं अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि को स्वीकृति प्रदान की गई। इस निर्णय से प्रदेश के लाखों शिक्षा कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा तथा शिक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।मंत्रिपरिषद के निर्णय की जानकारी देते हुए बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Sandeep Singh ने बताया कि वर्ष 2017 में 10,000 रुपये निर्धारित किए गए शिक्षामित्रों के मानदेय को बढ़ाकर अब 18,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इसी प्रकार अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय 9,000 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये प्रतिमाह किया गया है। यह बढ़ा हुआ मानदेय 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा तथा मई माह में दिए जाने वाले भुगतान में शामिल किया जाएगा।उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 1,42,929 शिक्षामित्र कार्यरत हैं, जिनमें से 1,29,332 शिक्षामित्रों का मानदेय अब तक समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत केंद्र व राज्य सरकार के 60:40 अनुपात में प्राप्त होता रहा है। मानदेय वृद्धि के फलस्वरूप इन पर आने वाला 1138.12 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। शेष 13,597 शिक्षामित्र, जिनका भुगतान पूर्णतः राज्य सरकार द्वारा किया जाता है, उनके लिए 119.65 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार भी राज्य सरकार वहन करेगी।उन्होंने बताया कि प्रदेश के 13,769 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वर्तमान में 24,717 अंशकालिक अनुदेशक कार्यरत हैं। मानदेय वृद्धि के इस निर्णय से इन अनुदेशकों को भी बड़ी राहत मिलेगी तथा इस पर 217.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत कर्मियों के हितों के प्रति संवेदनशील है और उनके आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। यह निर्णय न केवल शिक्षामित्रों एवं अंशकालिक अनुदेशकों के जीवन स्तर में सुधार लाएगा, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाएगा।