मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का आदर्श पूरे विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है-ओम प्रकाश आर्य
बस्ती। श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम थे। वह युगपुरुष, आदर्श राजा, ईश्वरभक्त, मातृ-पितृ भक्त, आदर्श भाई, पुत्र, शिष्य, प्रजापालक आदि थे। वह धर्म का साक्षात् रूप थे। उनके चरित्र का अनुकरण करना पूरे विश्व के लिए गौरव का विषय है। यह बातें ओम प्रकाश आर्य प्रधान आर्य समाज नई बाजार बस्ती ने स्वामी दयानंद विद्यालय सुरतीहट्टा बस्ती में रामनवमी के अवसर पर आयोजित यज्ञ के अवसर पर कही। इससे पूर्व यज्ञ कराते हुए योगाचार्य गरुण ध्वज पाण्डेय ने बच्चों को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि यदि किसी मनुष्य को धर्म का साक्षात् स्वरुप देखना हो तो उसे वाल्मीकि रामायण का अध्ययन करना चाहिये। श्री राम का चरित्र वस्तुतः आदर्श धर्मात्मा का जीवन चरित्र है। महर्षि दयानन्द ने आर्यसमाज की स्थापना करके वस्तुतः श्री रामचन्द्र जी के काल में प्रचलित धर्म व संस्कृति को ही प्रचारित व प्रसारित किया है। प्रधानाध्यापक आदित्य नारायण गिरि ने बच्चों को बताया कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने मानव समाज के लिए आदर्श व्यवहार की मर्यादाएं स्थापित कीं। वे आज से लगभग नौ लाख वर्ष पूर्व त्रेतायुग के अन्त में हुए थे। उनके समकालीन महर्षि वाल्मीकि ने अपने रामायण ग्रन्थ में उन्हें धर्म का उन्नायक और अधर्म का विनाशक बताया है। धर्म की रक्षा के लिए वे राज्य का भी त्याग कर देते हैं और अधर्म के विनाश के लिए अपने देश के साथ विदेश श्रीलंका भी जाकर असुरों को समूल नष्ट कर धर्मात्मा विभीषण को राज्य देकर एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। आज पूरे विश्व में रामनवमी किसी न किसी रूप में मनाई जाती है और राम का आदर्श अमर है। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक शिक्षिकाएं और बच्चे सम्मिलित रहे।
गरुण ध्वज पाण्डेय