महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव ‘रामनवमी’ के पावन अवसर पर अयोध्या धाम पूरी तरह से राममय हो चुकी है।राम नवमी का पर्व मन्दिर में बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया।रामनवमी का त्यौहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाया जाता है।हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन मर्यादा-पुरूषोत्तम भगवान श्री राम जी का जन्म हुआ था।अयोध्या के हजारों मठ मंदिरों में मर्यादा-पुरूषोत्तम प्रभु श्री राम के जन्म उत्सव का उत्साह देखने को मिला।रामनवमी के पर्व को लेकर पूरी नगरी में श्रद्धा अपने भक्तिमय पर है मठ मंदिरों में प्रभु राम की बधाइयां गाई गई।वहीं श्रृंगार भवन मंदिर में भी रामजन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया।वहाँ के महंथ श्री विश्वनाथ शरण ने बताया कि प्रभु श्री राम हमारे आराध्य है उनका जन्म मानने का सौभाग्य मिला जीवन धन्य हो गया और सुबह से ही मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। लोगों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त किया।मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था। भजन-कीर्तन और रामायण पाठ का आयोजन किया गया,जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।दोपहर के समय भगवान श्रीराम के जन्म का विशेष पूजन किया गया। जैसे ही जन्म का समय हुआ, मंदिरों में घंटा-घड़ियाल और शंखनाद से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। भक्तों ने “जय श्रीराम” के जयकारों के साथ उत्सव मनाया।बधाई गीत और सोहार गीतों को गाकर आज सभी का जीवन धन्य हो गया।राम नवमी के इस पावन अवसर पर लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और समाज में शांति, सद्भाव और भाईचारे का संदेश दिया।इस दिन नवरात्रि का समापन होता है।चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि को महा नवमी और राम नवमी भी कहा जाता है।विशेष रूप से भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान की झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही।मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी राम नवमी का पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।पूरे आयोजन के दौरान भक्तों में गहरा उत्साह देखने को मिला और मंदिर परिसर “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा।प्रसाद वितरण के साथ ही श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को राम नवमी की शुभकामनाएं दीं और सुख-समृद्धि की कामना की।