हर्षोल्लास के साथ मनाया गया श्रीराम जन्मोत्सव व माता के भजनों से गूंजता रहा वि‌द्यालय प्रांगण

हर्षोल्लास के साथ मनाया गया श्रीराम जन्मोत्सव व माता के भजनों से गूंजता रहा वि‌द्यालय प्रांगण

 

बस्ती ( अनुराग लक्ष्य न्यूज ) आज दिनांक 26 मार्च दिन बृहस्पतिवार को लिटिल फ्लावर्स स्कूल सुरेन्द्र नगर कटरा बस्ती में श्रद्धा-भक्ति के साथ चैत्र नवरात्र के पावन पर्व पर हर्षोल्लास के साथ मनाया श्रीराम जन्मोत्सव। इस अवसर पर वि‌द्यालय के विभिन्न शिक्षक एवं शिक्षिकाओं ‌द्वारा गीत-संगीत का कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ वि‌द्यालय के प्रबंधक श्री सुरेन्द्र प्रताप सिंह जी एवं प्रधानाचार्या श्रीमती अपर्णा सिंह जी द्वारा माँ दुर्गा एवं मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का वैदिक विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन तथा आरती की गई।

कार्यक्रम के दौरान सर्वप्रथम वि‌द्यालय के शिक्षक एवं शिक्षिकाओं ने युगल स्वर में “प्यारा सजा है तेरा द्वार” नामक गीत को प्रस्तुत कर शमा बाँधा। इस जीत पर पूरा प्रांगण तालियों से गूँजता रहा।

कार्यक्रम के दौरान वि‌द्यालय की शिक्षिका पूनम त्रिपाठी ने महा अष्टमी तथा महा नवमी के महत्त्व पर प्रकाश डाला। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उपर्युक्त तिथि महागौरी एवं सिद्धिदात्री के रूप में प्रसिद्ध है। इस दिन माँ गौरी एिवं सिद्धिदात्री की विशेष पूजा की जाती है। यह दिन हमें अनुशासन, भक्ति और प्रकृति की सम्मान के सम्मान याद दिलाता है। माँ सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियाँ और मन:कामना पूर्ण करने वाली हैं। इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्त्व है यह परंपरा समाज में नारी शक्ति के सम्मान और पवित्रता का संदेश देती है।

 

चैत्र राम‌नवमी के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए प्रबंधक महोदय ने अपने प्रेरक और सारगर्भित शब्दों से सभी को अभिसिंचित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि राम जन्म के अनेक कारण है। जिसमें “विप्र धेनु सुर संत हित, लीन्ह मनुज औतार” अर्थात ब्राह्‌मण, गाय, देवता और संतों के कल्याण के लिए उन्होंने अवतार लिया। राम का चरित्र परम पवित्र और अनुकरणीय है, जिसे हमें अपने जीवन में उतारना चाहिए। राम को श्रीराम बनने के लिए घर से बाहर निकलना पड़ा। हमें भी अपनी महत्ता बढ़ाने के लिए घर से बाहर निकल कर सकारात्मक दिशा में प्रयास करना चाहिए।

 

इस अवसर पर वि‌द्यालय की प्रधानाचार्या महोद‌या ने नवरात्र पर चर्चा करते हुए नारी शक्ति पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जीवन में वहीं सफल होता है जिसके अन्दर आत्म-विश्वास होता है। उन्होंने अपने संबोधन को अध्यात्म से जोड़ते हुए कहा कि जहाँ वैज्ञानिक शक्तियाँ समाप्त होती है, वहीं से आध्यात्मिक शक्तियाँ शुरु होती है। इसलिए हमें वैज्ञानिक शक्तियों के साथ- साथ आध्यात्मिक शाक्तयों का भी संचित करना चाहिए। उन्होंने अपनी स्वरचित कविता के माध्यम से लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि :

 

*”डरना नहीं किसी के भी पैरों के नाप से,*

*आखिर पुण्य जीत ही जाएगा पाप से।*

*गीता में कृष्ण ने कहा अर्जुन से बस यही,*

*पहली लड़ाई जीतनी है अपने-आप से।।*

कार्यक्रम का समापन श्रीराम भजन से हुआ। इसकी घोषणा वि‌द्यालय की शिक्षिका ने ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के भाव से किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में अर्पिता सिंह, मधु सिंह, पूजा जायसवाल, राजमणि वर्मा, तन्मय पाण्डेय, रुचि, साक्षी पाण्डेय, साक्षी गुप्ता ने अपना अपूर्व योगदान दिया। इस अवसर पर सृष्टि उपाध्याय, कात्यायनी पाण्डेय, अर्चना, डिम्पल, शशांक शुक्ला, आनंद आर्या, अरुण भट्ट, दीप देव द्विवेदी, शिवेन्द्र पाण्डेय, तपन कुमार घोष, अनूप बरनवाल आदि शिक्षक-शिक्षिकाओ सहित वि‌द्यालय के अन्य शिक्षणेत्तर कर्मचारी भी उपस्थित रहें।