प्रतापगढ़: बिहार ब्लॉक की क्षेत्र पंचायत बैठक में हंगामा, अधिकारियों की गैर-मौजूदगी पर बिफरे प्रधान संघ जिलाध्यक्ष

प्रतापगढ़: बिहार ब्लॉक की क्षेत्र पंचायत बैठक में हंगामा, अधिकारियों की गैर-मौजूदगी पर बिफरे प्रधान संघ जिलाध्यक्ष

अधिकारियों की बेरुखी को बताया ‘सदन का अपमान’, नवीन कुमार सिंह ‘पिन्टू सिंह’ ने मंच से की निंदा प्रस्ताव की मांग

बिहार (प्रतापगढ़)। विकास खंड बिहार के सभागार में बुधवार को आयोजित क्षेत्र पंचायत की बैठक उस समय रणक्षेत्र में तब्दील हो गई, जब आमंत्रण के बावजूद कई महत्वपूर्ण विभागों के जिम्मेदार अधिकारी नदारद मिले। इस घोर लापरवाही पर प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष नवीन कुमार सिंह उर्फ पिन्टू सिंह का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मंच से दहाड़ते हुए इसे न केवल जनप्रतिनिधियों का, बल्कि पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान करार दिया।

“क्या जनप्रतिनिधियों की कोई अहमियत नहीं?”

पिन्टू सिंह ने तीखे स्वर में सवाल किया कि जब बाघराय पुलिस प्रशासन, सीएचसी बाघराय और बिजली विभाग जैसे जनहित से जुड़े विभागों को विधिवत आमंत्रित किया गया था, तो उनकी अनुपस्थिति का क्या कारण है? उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की यह मनमानी विकास कार्यों की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है।

ग्राम प्रधानों की अनदेखी का उठा मुद्दा

बैठक में केवल अधिकारियों की गैर-मौजूदगी ही नहीं, बल्कि ग्राम प्रधानों के साथ हो रहे सौतेले व्यवहार का मुद्दा भी गरमाया। पिन्टू सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा— “पूरे कार्यकाल में ग्राम प्रधानों से विकास कार्यों के प्रस्ताव तक नहीं लिए गए। पंचायत व्यवस्था को ताक पर रखकर केवल चुनिंदा तरीके से योजनाओं को आगे बढ़ाया गया है, जो सरासर अन्याय है।”

खंड विकास अधिकारी (BDO) की गैर-मौजूदगी ने खड़े किए सवाल

हैरानी की बात तब रही जब चर्चा उठी कि खुद खंड विकास अधिकारी भी बैठक से नदारद थे। सदन में मौजूद सदस्यों ने एक सुर में कहा कि जब ‘कप्तान’ ही मैदान छोड़कर बाहर रहेगा, तो विकास की गाड़ी कैसे चलेगी?

सदन में गूंजी ‘निंदा प्रस्ताव’ की मांग

अधिकारियों और कर्मचारियों की इस कार्यशैली के खिलाफ पिन्टू सिंह ने सदन से निंदा प्रस्ताव पारित करने की जोरदार मांग की। उनके इस प्रस्ताव को वहां मौजूद क्षेत्र पंचायत सदस्यों और प्रधानों का भारी समर्थन मिला। सदन में छाई खामोशी और जनप्रतिनिधियों का आक्रोश यह बताने के लिए काफी था कि ब्लॉक प्रशासन के प्रति भारी असंतोष व्याप्त है।

बड़ा सवाल:

क्या प्रशासन इन लापरवाह अधिकारियों पर कोई सख्त कार्रवाई करेगा, या जनप्रतिनिधियों की यह आवाज फाइलों में ही दबकर रह जाएगी?