राम वन गमन की कथा सुन भावुक हुए श्रोता
रिपोर्टर अनुराग उपाध्याय
प्रतापगढ़:- अचलपुर कैरियर एकेडमी में चल रही संगीतमयी कथा के पांचवे दिन कथा वाचक मुक्तामणी शास्त्री ने राम वन जाने की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि अयोध्या के राजा दशरथ गुरू वशिष्ठ के परामर्श से प्रभु राम के तिलक की तैयारी में जुटे थे। इधर मंथरा ने सबसे छोटी रानी कैकेयी के मन में विद्वेष की भावना पैदा कर दिया। कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान के बदले राम को चौदह वर्ष का वनवास और भरत को अयोध्या का राजा बनाने की मांग रख दी। राजा दशरथ को कैकेयी की इच्छा जानकर काफी दुख हुआ। जब इसका पता प्रभु श्री राम को हुआ तो वह माता पिता के आदेश को मानकर वनवास जाने लगे तो लक्ष्मण जी भी वनवास जाने की जिद करने लगे। अंत में प्रभु श्रीराम मां सुमित्रा के आदेश पर साथ ले जाने के लिए तैयार हुए। साथी में सीता मां भी वनगमन की। भगवान के वन गमन की कथा सुनकर श्रोता भावुक हो गए। इस दौरान विभांशु पाडेय ,अनमोल, पोरस, शैल पाडेय सिया ,दिशा प्रीती पाडेय आदि उपस्थित रहे।