कुदरहा, बस्ती। संस्कारवान ब्यक्ति के जीवन मे कभी सम्पत्ति की कमी नही होती है। मनुष्य के जीवन मे संस्कार सबसे महत्वपूर्ण होता है।बच्चों के जन्म के बाद संस्कार की आवश्यकता होती है।बच्चों का मन सादे श्याम पट के समान होता है।इस पर सुंदर बिचारो का अंकन श्रेष्ठ ब्यक्तित्व का निर्माण करता है।बच्चों को बिकारो से दूर रखने के लिए संस्कृति और संस्कारो का ज्ञान आवशयक है।
यह सदविचार स्तुति जी ने हठ्ठी माता मंदिर अगौना में शतचंडी महायज्ञ के अवसर पर चल रही नौ दिवसीय संगीतमयी श्री राम कथा के छठे दिन ब्यास पीठ से प्रवचन सत्र मे ब्यक्त किया। उन्होने भगवान के बाल लीला व नामकरण की कथा को बिस्तार देते हुए कहा भगवान शिव भी कैलाश पर्वत से काकभुशुन्डी जी के साथ अवध आये। और भगवान के बाल रूप का दर्शन किया और रामतत्व को बताया। उन्होंने कहा कि महाराज दशरथ ने भी अपने चार पुत्रों का नामकरण गुरु वशिष्ठ से कराया था।नामकरण हमेशा श्रेष्ठ ब्यक्ति से ही करवाना चाहिए। सोलह संस्कारों में एक संस्कार नामकरण भी है।
कथा में मुख्य यजमान मग्घू प्रजापति, आयोजक प्रिंस यादव, पप्पू यादव, यज्ञाचार्य सुरेद्र शास्त्री, डा.प्रेम त्रिपाठी, दीनानाथ शास्त्री, राम अशीष प्रजापति, रमेश, राहुल बबलू, रामशंकर, आकाश अग्रहरि, यशपाल, पलकधारी यादव, मुन्नू पाठक शिव प्रसाद, बंशीलाल, शिवपूजन, प्रेमनाथ, कृपाशंकर, ज्ञानचंद, द्विवेदी सहित तमाम श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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