चैटिंग की लत बन रही है सेहत की दुश्मन डिजिटल मनोरंजन के चक्कर में बढ़ रहा है तन-मन का तनाव – प्रो.डॉ नवीन सिंह

चैटिंग की लत बन रही है सेहत की दुश्मन डिजिटल मनोरंजन के चक्कर में बढ़ रहा है तन-मन का तनाव – प्रो.डॉ नवीन सिंह

 

बस्ती। आधुनिक युग में चैटिंग और नेट सर्फिंग मनोरंजन और संवाद का अहम साधन बन गए हैं, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो यह आदत अब स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। मोबाइल और इंटरनेट के अत्यधिक उपयोग से नींद की कमी, तनाव, आंखों की समस्या, हृदय रोग, यहां तक कि प्रजनन क्षमता में गिरावट जैसी दिक्कतें तेजी से बढ़ रही हैं।

 

अखण्ड एक्यूप्रेशर रिसर्च ट्रेनिंग एंड ट्रीटमेंट इंस्टीट्यूट, प्रयागराज के निदेशक, प्रोफेसर डॉ नवीन सिंह का कहना है कि मोबाइल की रेडियो फ्रीक्वेंसी बेस स्टेशन से हजार गुना अधिक होती है। “लंबे समय तक मोबाइल फोन का उपयोग करने से शरीर पर रेडिएशन का असर बढ़ता है, जिससे कैंसर का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है,” उन्होंने बताया।

 

ब्रेन और नींद पर सीधा असर डॉ. सिंह के अनुसार, लगातार चैटिंग करने से मस्तिष्क पर दबाव बढ़ता है। इससे ब्रेन ट्यूमर और साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर जैसी समस्याओं का जोखिम रहता है। रात में देर तक चैटिंग करने की आदत से नींद पूरी नहीं होती, जिससे दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और धीरे-धीरे अनिद्रा की शिकायतें बढ़ती हैं।

 

आंखें और हृदय भी हैं खतरे में स्क्रीन पर लंबे समय तक नजरें टिकाए रखने से आंखों में जलन, लालिमा, सूखापन और रोशनी कमजोर पड़ने जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। एक हालिया सर्वे के अनुसार, मोबाइल का अत्यधिक उपयोग हार्ट डिजीज और हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम को भी बढ़ाता है।

 

पोज़चर और प्रजनन क्षमता पर असर डॉ. नवीन ने चेताया कि चैटिंग के दौरान देर तक एक ही पोजिशन में बैठे या लेटे रहने से न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं। वहीं मोबाइल रेडिएशन प्रजनन क्षमता पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है — इससे पुरुषों में स्पर्म काउंट घट सकता है और महिलाओं में बांझपन जैसी समस्या देखी गई है।

 

टेक्नोलॉजी का सीमित प्रयोग ही समाधान डॉ. नवीन सिंह “टेक्नोलॉजी हमारी सहायक है, स्वामी नहीं। चैटिंग और नेट सर्फिंग को मनोरंजन तक सीमित रखें, ताकि मानसिक शांति और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित रहें।”