“रामचरित मानस दर्शन” महाअभियान से संस्कृति जागरण का संकल्प
अयोध्या।
कलियुग के इस दौर में जब सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्य निरंतर चुनौतियों से जूझ रहे हैं, ऐसे समय में समाजसेवी शुशील चतुर्वेदी ने सनातन संस्कृति और रामभक्ति को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से एक विराट और दूरदर्शी पहल की है। उनके नेतृत्व में प्रारंभ हुआ “रामचरित मानस दर्शन” महाअभियान आज एक सांस्कृतिक आंदोलन का रूप लेता जा रहा है, जिसकी तुलना कलियुग में गोस्वामी तुलसीदास के युगांतकारी कार्यों से की जा रही है।
इस महाअभियान के अंतर्गत जयपुर निवासी, राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित एवं राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त चित्रकार नवीन शर्मा द्वारा लगभग छह वर्षों की सतत साधना से निर्मित “श्री रामसरावर” को अयोध्या धाम में स्थायी दर्शन स्थल के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य तेज़ी से प्रगति पर है। करीब 20 लाख चित्रों के माध्यम से संपूर्ण रामचरित मानस को सजीव रूप में प्रस्तुत करने वाला यह प्रकल्प अपने आप में अद्वितीय है।
शुशील चतुर्वेदी का यह प्रयास केवल कला या प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सांस्कृतिक एवं सामाजिक चेतना अभियान है। उनके नेतृत्व में संचालित “घर-घर मानस अभियान” का उद्देश्य रामचरित मानस को मात्र ग्रंथ के रूप में नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन और सामाजिक मूल्यों के संवाहक के रूप में स्थापित करना है।
इस दिव्य अभियान को
इंद्रेश कौशिक महाराज (खमख्या धाम, अयोध्या),
बाल योगी महाराज सूरजदास,
एवं महंत रविंद्र पुरी महाराज
का आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन प्राप्त है, जिससे इस संकल्प को आध्यात्मिक ऊर्जा और वैचारिक बल मिला है।
इस अवसर पर शुशील चतुर्वेदी ने कहा कि आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है रामचरित मानस को नई पीढ़ी तक सरल, सजीव और प्रभावशाली माध्यमों से पहुँचाना। यह प्रकल्प किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों का है, जो उन्हें संस्कार, मर्यादा और मानवता का मार्ग दिखाएगा।
कार्यक्रम में तक्षशिला संस्थान के डायरेक्टर संतोष मिश्रा, चिचला मठ के सतेंद्र पांडेय महाराज, प्रसिद्ध कवि दुर्गेश दुर्लभ, पर्यटन विभाग से प्रभात मिश्रा, अरविंद पाठक, आदेश कुमार, हनुमानगढ़ी से अनिल दास सहित अनेक गणमान्य एवं प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने सहभागिता की और इस महाअभियान को समय की आवश्यकता बताया।
आयोजकों के अनुसार, भविष्य में इस महाअभियान के अंतर्गत रामचरित मानस दर्शन को शैक्षणिक पाठ्यक्रम से जोड़ा जाएगा, डिजिटल एवं ऑनलाइन माध्यमों से इसे देश-विदेश तक पहुँचाया जाएगा तथा इस विषय पर तैयार विशेष पुस्तक का भव्य विमोचन भी शीघ्र किया जाएगा।
यह महाअभियान समाजसेवी शुशील चतुर्वेदी की उस सोच का जीवंत उदाहरण है, जिसमें सनातन संस्कृति अतीत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की दिशा तय करने वाली शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित होती है।