चमन से यह कैसी हवा चल पड़ी है, शिकस्ता है हर गुल, लहू हर कली है, इमरान गोंडवी

चमन से यह कैसी हवा चल पड़ी है, शिकस्ता है हर गुल, लहू हर कली है, इमरान गोंडवी,,,,,

अनुराग लक्ष्य, 15 दिसंबर ।

सलीम बस्तवी अज़ीज़ी

मुम्बई संवाददाता ।

मुंबई की साहित्यिक और अदबी महफिलों में अपनी उम्दा शायरी से सभी को मंत्रमुग्ध कर देने वाले शायर इमरान गोंडवी को आज कौन नहीं जानता और पहचानता है।

अपने उम्दा कलाम और शानदार मंचीय प्रस्तुति से सभी अहबाब को मंत्रमुग्ध करते हुए आज अपनी बुलंदियों को छू रहे हैं।

इमरान गोंडवी आज मुंबई की साहित्यिक और अदबी आब ओ हवा में खुशबू बिखेरते हुए अपने बेहतरीन कलाम से सामयीन के दिलों में उतरती जा रहे हैं। आज हालात ए हाजरा पर उनका एक खास गीत लेकर मैं सलीम बस्तवी अज़ीज़ी ब्यूरो प्रभारी अनुराग लक्ष्य मुंबई लेकर हाज़िर हो रहा हूँ ।

मुखड़ा / चमन में यह कैसी हवा चल पड़ी है,

शिकस्ता है हर गुल लहू हर कली है।

अंतरा 1 /

न गीतों का लहजा न लब पे तबस्सुम,

अजब रास्ता है, मुसाफिर है गुमसुम,

हैं आँखें खुली और ज़बां सो गई है,

चमन ने यह कैसी हवा चल पड़ी है।

मुखड़ा 2/

यह कैसा समा है , यह कैसा है मौसम,

सितम ढा रही है , गुलों पे जो शबनम,

हैं बेनूर गुंचे, कली अधखिली है,

चमन ने यह कैसी हवा चल पड़ी है।

अंतरा 3 /

कहीं देखो क़ातिल है भाई का भाई ,

कहीं बाप कहता है मौला दुहाई,

कहीं माँ की ममता बला में घिरी है,

चमन में यह कैसी हवा चल पड़ी है।

अंतरा 4 /

वफा करने वाले जफा बो न जाए,

नमाज़ ए मुहब्बत क़ज़ा हो न जाए,

ऐ ,इमरान, उठ जा अज़ाँ हो रही है,

चमन में यह कैसी हवा चल पड़ी है।

शिकस्त है हर गुल लहू हर कली है।

पेशकश, सलीम बस्तवी अज़ीज़ी ब्यूरो प्रभारी अनुराग लक्ष्य मुंबई।