समाचारों की दुनिया में संवेदनशीलता की कमी क्यों?

— झूठी खबरों की जल्दबाज़ी और हमारी ज़िम्मेदारी
हाल ही में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब एक प्रसिद्ध न्यूज़ रिपोर्टर ने बॉलीवुड अभिनेता धर्मेंद्र के बारे में गलत खबर प्रसारित कर दी। बिना सत्यता की पुष्टि किए उनकी मृत्यु की अफवाह को ऊँची आवाज़ और सनसनीखेज़ अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया। सोशल मीडिया से लेकर कई चैनलों पर यह झूठी सूचना फैलती चली गई, जबकि वास्तविकता यह थी कि अभिनेता पूरी तरह स्वस्थ थे—यह बात स्वयं उनके परिवार और बेटों ने स्पष्ट रूप से बताई।
इस घटना ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि आख़िर कब से समाचारों का उद्देश्य संवेदना, सत्य और जिम्मेदार पत्रकारिता से हटकर सिर्फ़ टीआरपी बन गया?
क्यों आज कुछ रिपोर्टर किसी की मृत्यु जैसे संवेदनशील विषय को भी शोर, ड्रामा और जल्दी दिखाने की होड़ में बदल देते हैं?
क्या किसी की मृत्यु पर “पहले हम दिखा रहे हैं” जैसी मानसिकता, एक मानवीय समाज के तौर पर हमें कहीं न कहीं खोखला नहीं कर रही?
यह घटनाक्रम मुझे महाभारत की उस घटना की याद दिलाता है, जब सिर्फ़ युद्ध समाप्त करने के लिए “अश्वत्थामा मारा गया” जैसी बात आधा-सत्य और आधा-असत्य रूप में बोली गई।
आज भी वही जल्दबाज़ी दिखाई देती है—बस फर्क इतना है कि आज के ‘धर्मयुद्ध’ की जगह टीआरपी का युद्ध चल रहा है।
हमारी नई पीढ़ी अख़बार कम और डिजिटल माध्यम अधिक पढ़ती है। वे टीवी, मोबाइल और सोशल मीडिया से मिलने वाली खबरों पर भरोसा करती है। ऐसे में पत्रकारों और समाचार चैनलों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
समाचार जनता का भरोसा होते हैं—उन्हें अफवाहों का माध्यम नहीं बनना चाहिए।
किसी की मृत्यु पर शोर नहीं, संवेदना होनी चाहिए।
किसी की बीमारी या अचानक फैलने वाली खबर पर सत्यता की जांच अनिवार्य होनी चाहिए।
और सबसे महत्वपूर्ण—मानवीय गरिमा को हमेशा समाचारों से ऊपर रखा जाना चाहिए।
मुझे दुख है कि आज झूठी खबरें पहले चलाना एक उपलब्धि समझी जाती है, और बाद में माफी माँगना एक औपचारिकता। यही कारण है कि लोगों ने इस घटना को लेकर मीम्स तक बना दिए—जो एक गंभीर विषय का मजाक बना देता है।
मेरा विनम्र निवेदन है कि
समाचारों का उद्देश्य ‘सबसे पहले दिखाना’ नहीं, बल्कि ‘सबसे सही दिखाना’ होना चाहिए।
पत्रकारिता का मूल धर्म सत्य, संवेदना और ज़िम्मेदारी है।
किसी की मृत्यु का समाचार टीआरपी का साधन नहीं, बल्कि गहरी मानवता के साथ प्रस्तुत की जाने वाली जानकारी होना चाहिए।
धन्यवाद।
नेहा वार्ष्णेय (लेखिका)