रिपोर्टर अनुराग उपाध्याय
देवगलपुर में चल रही भागवत कथा के दौरान वृंदावन धाम से आए आचार्य सत्यम महाराज ने कहा कि भगवान हमेशा अपने भक्तों के वश में रहते हैं। उन्होंने भक्त प्रहलाद के चरित्र को अनुकरणीय बताया। आचार्य सत्यम महाराज ने कहा कि भक्तों में भगवान के सबसे प्रिय भक्त प्रहलाद थे। प्रहलाद ने बार-बार पिता हिरण्यकश्यप के कहने के बावजूद भगवान की भक्ति नहीं छोड़ी। अंततः भगवान ने नरसिंह अवतार लेकर सत्य व धर्म की रक्षा करते हुए हिरण्यकश्यप का अंत किया। उन्होंने भक्त ध्रुव के चरित्र का भी वर्णन किया। आचार्य ने बताया कि पांच वर्ष की अवस्था में ही ध्रुव ने कठोर तपस्या करके भगवदभक्ति प्राप्त कर ली थी। आज भक्त प्रहलाद और ध्रुव का चरित्र प्रेरणास्रोत के रूप में है।