लखनऊ, भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने प्रदेश मंत्रिमंडल द्वारा समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दिए जाने का स्वागत करते हुए इसे सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि उसके लिए सामाजिक न्याय केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि धरातल पर लागू होने वाली व्यवस्था है।पंकज चौधरी ने कहा कि पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण को संवैधानिक और कानूनी रूप से मजबूत आधार देने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन एक ऐतिहासिक कदम है। यह आयोग ग्रामीण निकायों में पिछड़े वर्गों की सामाजिक एवं राजनीतिक भागीदारी का अध्ययन करेगा, जिससे आरक्षण का निर्धारण सही आंकड़ों, पारदर्शी प्रक्रिया और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे पिछड़े समाज को लोकतंत्र की जड़ों तक मजबूत प्रतिनिधित्व मिलेगा तथा स्थानीय स्तर पर उनकी भागीदारी और अधिक प्रभावी होगी।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार ऐसे निर्णय ले रही है, जिनसे गांव, गरीब, पिछड़े और वंचित समाज की लोकतांत्रिक भागीदारी मजबूत हो रही है। भाजपा सरकार का मानना है कि सामाजिक न्याय केवल नारों से नहीं, बल्कि मजबूत संस्थागत व्यवस्था, पारदर्शी नीति और वास्तविक प्रतिनिधित्व से सुनिश्चित होता है।पंकज चौधरी के अनुसार, केंद्र सरकार ने भी पिछड़े वर्गों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के साथ ही आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, हर घर जल, स्वनिधि योजना और विश्वकर्मा योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से गरीब एवं वंचित वर्गों को सीधे लाभ पहुंचाया जा रहा है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सामाजिक न्याय को वोट बैंक की राजनीति से बाहर निकालकर विकास और सम्मान से जोड़ा गया है। आज गरीब, पिछड़े, दलित और वंचित वर्ग का व्यक्ति केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि देश के विकास का सक्रिय भागीदार बन रहा है। भाजपा सरकार की नीतियों का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक अवसर, सुविधा और सम्मान पहुंचाना है।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आयोग में ऐसे विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें पिछड़े वर्गों से जुड़े विषयों की गहरी समझ और अनुभव हो। आयोग की अध्यक्षता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और संवैधानिक मजबूती सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि इससे पंचायत चुनावों में आरक्षण को लेकर भविष्य में भ्रम या विवाद की संभावना भी कम होगी।समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए पंकज चौधरी ने कहा कि सपा ने वर्षों तक पिछड़ों और दलितों के नाम पर केवल वोट बैंक की राजनीति की। चुनाव के समय पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) की बात की जाती है, लेकिन सत्ता में रहते हुए सामाजिक न्याय के लिए कोई ठोस, पारदर्शी और संस्थागत व्यवस्था विकसित नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की राजनीति परिवारवाद, तुष्टिकरण और चुनावी घोषणाओं तक सीमित रही है।उन्होंने कहा कि भाजपा का स्पष्ट मानना है कि पिछड़ों को केवल भाषण नहीं, बल्कि भागीदारी, अवसर और निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए। डबल इंजन सरकार इसी दिशा में लगातार कार्य कर रही है और समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन उसी संकल्प का सशक्त उदाहरण है।