रिपोर्टर अनुराग उपाध्याय
देवगलपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान वृंदावन धाम से आए आचार्य सत्यम महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। उन्होंने इसे कल्याणकारी कथा बताते हुए श्रोताओं से अपना जीवन धन्य बनाने का आह्वान किया। आचार्य सत्यम महाराज ने बताया कि कई जन्मों के पुण्य से जब मनुष्य का भाग्य उदय होता है, तभी उसे जीवन में भागवत कथा सुनने का अवसर मिलता है। उन्होंने जोर दिया कि जब कोई व्यक्ति सच्चे मन से कथा का श्रवण करता है, तो उसका जीवन धन्य और निर्मल बन जाता है, और उसके बंद भाग्य के कपाट खुल जाते हैं। कथा के महात्म्य का वर्णन करते हुए आचार्य ने राजा परीक्षित और धुंधकारी के उदाहरण दिए। उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित को कथा श्रवण से ही मोक्ष की प्राप्ति हुई थी, जबकि धुंधकारी को प्रेतयोनि से मुक्ति मिली थी। आचार्य सत्यम महाराज ने कलियुग में भगवान श्रीकृष्ण की वंदना और भगवन्नाम जाप को जीवन को सुखमय और धन्य बनाने का मार्ग बताया। कथा के समापन पर संयोजक सूर्यनारायण शुक्ल ने भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की आरती उतारी और प्रसाद वितरित किया। इस अवसर पर मुकेश शुक्ल, रत्नेश शुक्ल, अंकित, शुभम, अथर्व, आयुष, कान्हा, अंकुर और जनार्दन सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।