राजन जी महाराज ने बताया: शिव द्वारा रचित रामकथा में थे एक करोड़ श्लोक, ‘राम’ नाम है मोक्ष का मूल

प्रतापगढ़ के परानूपुर गांव में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन सोमवार को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथावाचक पूज्य श्री राजन जी महाराज ने भगवान राम के जन्मोत्सव प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया, जिससे पूरा वातावरण ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से गूंज उठा और श्रोता भावविभोर हो उठे।

शिव ने की थी श्रीराम कथा की रचना:

महाराज राजन जी ने अपने प्रवचन में श्रीराम कथा की रचना का रहस्य बताते हुए कहा कि भगवान शिव ने ही सर्वप्रथम श्रीराम कथा की रचना की थी और यह कथा सबसे पहले माता पार्वती को सुनाई थी। उन्होंने इस कथा के विस्तार का वर्णन करते हुए बताया कि शिव द्वारा रचित इस रामकथा में एक करोड़ श्लोक थे।

‘राम’ नाम है मोक्ष का मूल:

महाराज ने आगे बताया कि शिव ने एक करोड़ श्लोकों को देवताओं, दानवों और मनुष्यों में समान रूप से विभाजित कर दिया था, लेकिन अंत में बचे दो शब्द ‘राम’ को उन्होंने किसी को नहीं दिया। उन्होंने कहा कि ‘राम’ ही मोक्ष का मूल है।

शुभ आचरण ही परम धर्म:

राजन जी महाराज ने श्रोताओं को जीवन का परम धर्म बताते हुए कहा कि निज धर्म का पालन करना और शुभ आचरण में रहना ही परम धर्म है। उन्होंने रामायण को वेदों, गीता और भक्ति के सागर में डुबोने वाली बताया। उन्होंने दूसरों की अच्छाइयों की चर्चा करने और समाज में अच्छाई को जागृत करने को सच्चा मानव धर्म बताया।

सनातन धर्म का संदेश:

महाराज ने गोस्वामी तुलसीदास जी के जन्म प्रसंग का आध्यात्मिक वर्णन किया और कहा कि सनातन धर्म में जन्म लेना परम सौभाग्य की बात है। उन्होंने हिंदू समाज को संगठित और जागरूक रहने का संदेश दिया, साथ ही धर्म परिवर्तन करने वालों की आलोचना भी की।

कथा सुनने के लिए परानूपुर में भक्तों की इतनी बड़ी भीड़ उमड़ी कि कथा स्थल का टेंट परिसर छोटा पड़ गया और कई भक्तों को खड़े होकर कथा का आनंद लेना पड़ा। आयोजकों को भीड़ को नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।