एक शाम तुम्हारा साथ हुआ बारिश की चंद बूंदों के साथ, और दिल के झरोखों पे उभरने लगे कुछ महकते और खनकते जज्बात, सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,,,,,
अनुराग लक्ष्य 4अक्टूबर
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
आप सच मानें कि हिन्दुस्तानी शायरी ने हमेशा अपने दामन में गीत ग़ज़ल और गीतों के साथ पूरे माहौल में जो खुशबू बिखेर देती है। वोह आप को सदियों से देखने को और सुनने को मिल रहा है। जिससे आपके पूरे माहौल को शायरी खुशनुमा बना देती है।
आज मैं सलीम बस्तवी अज़ीज़ी आपको कुछ ऐसे ही अशआर से रूबरू कराना चाहता हूं, जिससे आपकी रूह पुरसुकून हो जाए ।
/1 जिंदगी जिंदगी जिसको कहते हो तुम,
क्या कभी उसके दिल में भी रहते हो तुम ।
तुमने सोचा है क्या ज़िंदगी में कभी,
किस सबब रेत की तरहा बहते हो तुम ।।
2/ ज़िंदगी का आईना हम किसको बनाएं,
टूटे हुए दिल को अब हम किसको दिखाए,
आंसुओं के रेले में, खुशियों के मेले में,
एक सच्चा यार अब हम किसको बनाएं ।।
3/ एक शाम तुम्हारा साथ हुआ बारिश की चंद बूंदों के साथ,
और दिल के झरोखों पे उभरने लगे कुछ महकते और खनकते जज्बात ।
4/ प्यार में ज़िंदा होते हुए भी मर जाना हो जाता है,
जब कोई सांसों में समाकर बेगाना हो जाता है ।
हमने शमाँ को आज भी ज़िंदा रक्खा है तूफानों में,
हमसे पूछे कैसे कोई दीवाना हो जाता है
।।