साप्ताहिक विषय: “भक्ति, शक्ति, तप और देवी आराधना के नौ दिन – नवरात्र”
नवरात्रि—एक ऐसा पर्व जो केवल धार्मिक अनुष्ठानों का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नयन, प्रकृति से जुड़ाव और आधुनिक जीवन मूल्यों की पुनर्पुष्टि का प्रतीक है। उन्मुक्त उड़ान मंच द्वारा आयोजित इस सप्ताह की विशेष परिचर्चा में मंच के विभिन्न रचनाकारों ने अपने-अपने दृष्टिकोण सांझा किए। वरिष्ठ साहित्यकार अशोक दोशी “दिवाकर” ने कहा— “नवदुर्गा के नौ रूप जीवन के विभिन्न चरणों को दर्शाते हैं। ये हमें साहस, ज्ञान, प्रेम और जीवन के मूल्यों का महत्वपूर्ण सबक देते हैं।” शिखा खुराना ने अपनी बात में कहा— “नवरात्रि और माता के व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं हैं, बल्कि इनसे सामाजिक, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का संतुलन भी जुड़ा है।” स्वर्णलता सोन कोकिला ने ऋतु और धर्म के संबंध को स्पष्ट करते हुए कहा— “ऋतु और प्रकृति का हमारे चिंतन और धर्म में विशेष स्थान है, इसी संधिकाल को हमारे ऋषि-मुनियों ने नवरात्रि का नाम दिया।” संजीव कुमार भटनागर ‘सजग’ के अनुसार— “नवरात्रि का उपवास आत्मसंयम और मन की एकाग्रता को बढ़ाकर आध्यात्मिक ऊंचाई तक ले जाता है।” कृत्यानंद झा ने काव्यात्मक शैली में कहा—
“नवरात्रि में प्रकृति सुरभित होती है फूलों से, और फलों से सजता है हर बाजार।” संगीता चमोली ‘इंदुजा’ का मत था— “यह पर्व शक्ति, सिद्धि, बुद्धि, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का संतुलन प्रदान करता है।” नीरजा शर्मा ‘अवनि’ ने नवरात्र को शुभ कार्यों के प्रारंभ के लिए श्रेष्ठ अवसर बताया। नंदा बमराडा ‘सलिला’ ने इसे सनातन धर्म की आत्मा बताते हुए कहा कि— “यह समय भक्ति से मन को निर्मल कर देता है।” सुरेश चंद्र जोशी ‘सहयोगी’ ने नवरात्रि के साथ नववर्ष और संवत्सर के प्रारंभ को जोड़ा। वीना टंडन ‘पुष्करा’ ने माँ दुर्गा को शक्ति का प्रतीक बताते हुए उनके अवतरण को धर्म की पुनर्स्थापना बताया। अनिल रही ने बताया— “उपासना, साधना और आराधना—ये तीनों भाव जब समग्र रूप में साधक अपनाता है, तब भक्ति, शक्ति और तप जाग्रत होते हैं।” दिव्या भट्ट ‘स्वयं’ ने कहा— “ये नौ दिन हमारे मन को संयमित करने, क्रोध, लोभ और मोह पर विजय पाने का श्रेष्ठ अवसर हैं।” माधुरी शुक्ला ने पर्व की महत्ता को इस प्रकार व्यक्त किया— “नवरात्रि हमें साहस, श्रद्धा, धैर्य और मन की पवित्रता से जुड़ने का सजीव संदेश देती है।” मंच की संस्थापक डॉ. दवीना अमर ठकराल ‘देविका’ ने समापन में कहा— “देवी स्वयं प्रकृति रूपा हैं। अतः पूजा में प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग करें, तामसिक भोजन से दूर रहें और श्रद्धाभाव के साथ माँ की आराधना करें।” उन्होंने यह भी बताया कि नवरात्रि की प्रथम तीन रात्रियाँ माँ दुर्गा, मध्य की रात्रियाँ माँ लक्ष्मी और अंतिम तीन माँ सरस्वती को समर्पित होती हैं, जिससे तमोगुण का नाश और दैवी गुणों का उदय होता है।
उन्मुक्त उड़ान मंच द्वारा आयोजित नवरात्रि विशेष कार्यक्रम में भक्ति और सृजन का अद्भुत संगम देखने को मिला। चैत नवरात्रि के पावन अवसर पर नौ दिनों तक मंच के रचनाकारों ने माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों — शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक — को समर्पित अपनी रचनाओं द्वारा देवी आराधना का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में देशभर से जुड़े विभिन्न रचनाकारों ने वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से माँ को अपनी कविता, गीत, भजन, और छंदों के माध्यम से भावांजलि अर्पित की। मंच भक्ति भाव से सराबोर रहा — जहाँ शब्द माँ की महिमा बखानते रहे, वहीं स्वर भक्ति की गहराई में डूबे रहे। सुमधुर, कर्णप्रिय भजनों से वातावरण गूंज उठा, वहीं कविताएं, कुंडलियाँ, दोहे, ग़ज़लें और ललित निबंध जैसे विविध विधाओं में किए गए सृजन से श्रोताओं को माँ के अलग-अलग रूपों के दर्शन का अनुभव हुआ। मंच की संचालिका एवं मार्गदर्शक दवीना दीदी के निर्देशन में इस आयोजन को नई ऊँचाई मिली। मंच का उद्देश्य – सृजन के माध्यम से संस्कृति और भक्ति का संवाहन – पूर्णतः साकार होता दिखा।
उन्मुक्त उड़ान मंच के इस दिव्य आयोजन ने यह सिद्ध किया कि साहित्य और भक्ति के संगम से नवसंस्कृति का सृजन संभव है। यह आयोजन बार-बार स्मरणीय रहेगा।
आयोजन में प्रतिभागिता के लिए माँ अर्चक सम्मान और विषाद सम्मान से प्रतिभागियों को पुरुस्कृत किया गया| प्रतियोगिता और प्रतिभागिता के लिए सम्मान पत्र की रचनात्मकता और कल्पना को ध्यान में रखते हुये नीरजा शर्मा ‘अवनि’, सुमित जोशी ‘राइटर, जोश’, सुनील भारती और नीतू गर्ग ‘कमलिनी’ ने रचनात्मक पोस्टर, कोलाज और वीडियो बनाए, साथ ही अनुपम प्रशस्ति पत्रों के नवल रूप से रचनाकारों को सम्मान प्रदान किया। कृष्णकांत मिश्रा ‘कमल’ के सहयोग और डॉ दवीना अमर ठकराल ‘देविका’ के उद्बोधन ने रचनाकारों के लिए प्रेरणा और प्रोत्साहन का कार्य किया।
उन्मुक्त उड़ान मंच इन विचारों के माध्यम से अपने पाठकों और समाज को यह संदेश देना चाहता है कि नवरात्रि आत्मचिंतन, प्रकृति से एकात्मता और जीवन को संवारने का सुअवसर है।
इसी श्रृंखला में राम नवमी के पवित्र पावन पुनीत अवसर पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम कई महिमा का गुणगान कर 20 रचनाकारों ने अपनी अभिव्यक्ति वीडियो के माध्यम से प्रेषित कर मंच को राम नाम से गुंजायमान कर दिया।
इसी अवसर पर एक भावनात्मक और आध्यात्मिक आभासी गीत संध्या का आयोजन किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में देशभर से 13 रचनाकारों ने श्रीराम से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को अपने गीतों, भजनों एवं काव्य अभिव्यक्तियों के माध्यम से प्रस्तुत कर, वातावरण को राममय बना दिया। मंच की अध्यक्षा दवीना अमर ठकराल ‘देविका’ ने कार्यक्रम का शुभारंभ एक अत्यंत भावपूर्ण रचना से किया, जिसमें श्रीराम के समस्त आयामों — मर्यादा, करुणा, पराक्रम और भक्ति — को गूढ़ रूप में प्रस्तुत कर श्रोताओं के मन को छू लिया। मंच की संस्थापिका व अध्यक्षा के दिशा निर्देश व मंच संचालन से प्रतिष्ठित रचनाकाराओं एवं रचनाकारों नीरजा शर्मा “अवनि”, नंदा बमराडा”सलिला”, डॉ पूनम सिंह”सारंगी”, रेखा पुरोहित ‘तरंगिणी’, नीतू रवि गर्ग ‘कमलिनी’, आशा बूटोला”सुप्रसन्ना”, संजीव कुमार भटनागर ‘सजग’, सुरेश चंद्र जोशी ‘सहयोगी’, वीना टंडन ‘पुष्करा’, तथा डॉ पुर्णिमा पाण्डेय ‘पूर्णा’ ने अपने-अपने राममय गीतों से सभी को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम में श्रीराम के जन्म, वनगमन, सीता हरण, हनुमान का पराक्रम, तथा लंका विजय जैसे प्रसंगों को रचनाओं में समाहित करते हुए, “हम सब में हैं राम, हम सबके हैं राम” की भावना को जीवंत किया गया। उन्मुक्त उड़ान मंच की यह प्रस्तुति न केवल एक साहित्यिक आयोजन थी, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभूति भी रही, जिसने श्रोताओं के हृदय में रामभक्ति की ज्योति प्रज्वलित कर दी।
आयोजन का समापन करते हुए अध्यक्षा डॉ दवीना अमर ठकराल “देविका”ने सभी को एक राम भक्ति का गीत मिल कर गाने के लिए प्रेरित किया और समां बाँध दिया।
अंत में सभी को इसी प्रकार उन्मुक्त उड़ान परिवार के सभी सदस्यों के सहयोग से हर उत्सव को महोत्सव में बदलने का संकल्प लिया व सभी को रघुनायक सम्मान व रघुराज सम्मान से सम्मानित किया गया।