गोरखपुर में अंतरराष्ट्रीय धर्म और अध्यात्म फिल्मोत्सव, सिनेमा के जरिए आध्यात्मिक विरासत का जश्न

लखनऊ  में 20 से 22 मार्च तक अंतरराष्ट्रीय धर्म और अध्यात्म फिल्मोत्सव (आईएफएफआरएस) का भव्य आयोजन होने जा रहा है। योगीराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित इस फिल्म महोत्सव में मानवता और दिव्यता के गहरे संबंधों को दर्शाने वाली फिल्मों का प्रदर्शन होगा। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा प्रायोजित और इंडियन इंफोटेनमेंट मीडिया कॉर्पोरेशन (आईआईएमसी) द्वारा आयोजित इस महोत्सव में देश-विदेश के प्रसिद्ध फिल्म निर्माता, निर्देशक, विद्वान और सिने प्रेमी शामिल होंगे।फिल्म महोत्सव के उद्घाटन सत्र में सुप्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, उनके साथ जूरी के अन्य सदस्य भी मौजूद रहेंगे। गोरखपुर के सांसद और फिल्म अभिनेता रवि किशन और प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर भी फिल्मोत्सव के दौरान विशेष प्रस्तुतियों में भाग लेंगे। उद्घाटन सत्र की शुरुआत ‘शेड्स ऑफ उत्तर प्रदेश’ की स्क्रीनिंग से होगी, जिसके बाद ‘वाराणसी: द सिटी ऑफ निर्वाण’ का प्रदर्शन किया जाएगा।यह तीन दिवसीय फिल्म महोत्सव सिनेमा प्रेमियों के लिए एक अनूठा अनुभव लेकर आएगा। इस आयोजन में आगंतुकों के लिए प्रवेश निःशुल्क रहेगा, ताकि दर्शक धर्म, आध्यात्मिकता और संस्कृति पर केंद्रित प्रतिष्ठित फिल्मों, डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्मों का आनंद ले सकें।
पहले दिन ‘अघोरी’, ‘अमृत मंथन’, ‘दशावतार’, ‘बुद्ध सर्किट’ और ‘अनटोल्ड हिस्ट्री-काल भैरव’ जैसी फिल्में दिखाई जाएंगी। दूसरे दिन प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और लेखक विवेक रंजन अग्निहोत्री फिल्म निर्माण पर मास्टर क्लास देंगे। इस दिन ‘नैमिष’, ‘महाकुंभ’ और ‘इंडियाज ग्रैंड फेस्टिवल दुर्गा पूजा’ जैसी फिल्मों का प्रदर्शन होगा।अंतिम दिन कास्टिंग डायरेक्टर और निर्माता पराग मेहता अभिनय कला पर मास्टर क्लास लेंगे। इस दिन ‘डिस्कवरी वाराणसी’, ‘मथुरा वृंदावन’, ‘ओवरऑल यूपी’ और ‘यूपी-होम ऑफ द ताज’ जैसी फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी। महोत्सव का समापन एक विशेष पुरस्कार समारोह के साथ होगा, जिसमें सर्वश्रेष्ठ फिल्मों को सम्मानित किया जाएगा।उत्तर प्रदेश के पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि फिल्में संस्कृति और आध्यात्मिकता के प्रचार का सबसे प्रभावशाली माध्यम हैं। यह महोत्सव उत्तर प्रदेश की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने का मंच बनेगा और ऐसी फिल्मों को प्रस्तुत करेगा, जो धर्म, संस्कृति और आस्था को रचनात्मक रूप में पेश करती हैं। उन्होंने कहा कि गोरखपुर, गुरु गोरखनाथ और अन्य संतों की कर्मभूमि रहा है, जो ऐसे आयोजनों के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान है।आईएफएफआरएस 2025 का उद्देश्य ऐसी कहानियों को मंच देना है, जो सिनेमा को आध्यात्मिकता और कला के बीच एक सेतु के रूप में प्रस्तुत करें और समाज को नई दृष्टि प्रदान करें।