नया गीत प्रस्तुत आप को

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शंकर तेरे भजन बिन,जीवन है ये अधूरा||

हर-हर की धुन न जिसमें,नीरस वो मन तंबूरा|||

मानव की देह पाकर,भक्ति विहीन प्राणी||

आती है मौत जब तब,सब से वो दीन प्राणी||

मानव का तन भजन बिन,दूषित है जैसे घूरा|||

हर-हर की धुन न जिसमें,नीरस वो मन तंबूरा|||

जिसने विषय न भोगे,दुर्लभ है वो देह प्यारे||

जिसमें न स्वार्थ कोई,दुर्लभ वो नेह प्यारे||

तन-मन वो निष्कलंकित,निर्मल सफेद भूरा||

हर-हर की धुन न जिसमें,नीरस वो मन तंबूरा|||

मानुष की देह पर हैं,दुनिया के ॠण बहुत से|||

जीवन में कष्ट सहने,पड़ते हैं सच बहुत से||

सहकर जो कष्ट बाँटे,खुशियां वही है सूरा||

शंकर तेरे भजन बिन,जीवन है ये अधूरा||

अंजना सिन्हा “सखी ”

रायगढ़