पांऊ शिव मंदिर पर अमृत वर्षा करते- आचार्य अंजनी नंदन जी महराज

कुदरहा,बस्ती। आस्था और बिश्वास के बिना ईश्वर की कृपा नहीं होती। योगियों के ह्रदय में बैठे भगवान भी उन्हें बिश्वास के बगैर दिखाई नहीं पड़ते | ऐसे में बिश्वास पूर्ण भक्ति से ही ईश्वर का मिलन संभव है |
यह सद्विचार अवध धाम से आये कथा वाचक आचार्य अंजनी नंदन महाराज  जी महाशिवरात्रि पर्व पर सोमेश्वर नाथ धाम पांऊ मे रुद्र महायज्ञ के अवसर पर चल रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन ब्यास पीठ से प्रवचन सत्र मे ब्यक्त किया।उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन मे कितनी विकट परिस्थिति आ जाय।लेकिन उसे धैर्य और धर्म को नही छोड़ना चाहिए।और ईश्वर की भक्ति ,सेवा और धर्म की रक्षा करना मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है ।भागवत कथा श्रवण संकल्प और आस्था के साथ करना चाहिए ।जिससे उसका लाभ मानव जीवन मे मिल सके।
इस अवसर पर मुख्य रूप से यज्ञाचार्य प्रदीप शास्त्री, आचार्य रामजी शुक्ल, आयोजक ज्ञानचन्द दूबे, मन्दिर के पुजारी मदनमोहन दास उर्फ नागा बाबा,भगवती प्रसाद शुक्ल, पप्पू गुप्ता, केशव प्रसाद दूबे, अनिल दूबे, श्यामसुंदर दूबे, घनश्याम दूबे, अजय दूबे, मुन्ना तिवारी, पवन दूबे, ऋषभ दूबे, ज्ञान शुक्ला, दुर्गा प्रसाद शुक्ला, शिवशंकर शुक्ला,राघवेन्द्र शुक्ल,राम मूरत पाण्डेय, अम्बिका दूबे, मनोज दूबे, अविनाश गुप्ता, प्रभात शुक्ला, सच्चिदानंद त्रिपाठी, राम सुभग उर्फ छैलू बाबा, रामू कन्नौजिया, बलराम मौर्या, बालकेश भारती, अशोक समदर्शी सहित तमाम श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कलवारी, बस्तीः रुद्र महायज्ञ के अवसर चल रही नौ दिवसीय रामलीला में सोमवार की रात्रि कलाकारों ने परशुराम लक्ष्मण संवाद राम विवाह की लीला का सजीव मंचन कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अवध धाम से आये कलाकारों ने लीला मे भगवान गुरु की आज्ञा पर जनक पुर की पुष्पवाटिका मे दोनों भाई पुष्प लेने जाते हैं।और वहाँ सीता जी भी अपनी सखियो के साथ रहती है। भगवान का दर्शन प्राप्त होता है। और गुरू के साथ दोनो भाई स्वयंबर मे पहुंचे। जिसमें बिदेह राज की प्रत्रिज्ञा को स्वयंबर मे आये देश के राजाओं महाराजाओ को सुनाया ।जो शिव धनुष का खंडन करेगा उसी के साथ मेरी पुत्री का विवाह होगा।शिव धनुष  राजाओं से नही टूटा तो महाराज जनक अधीर हो गये  और बोले मेरी इस पुत्री का विवाह बिधाता ने लिखा ही नही है, और पृथ्वी बीरो से बिहीन हो चुकी है।इस पर रघुकुल के राम ने गुरू की आज्ञा पर धनुष का खंडन कर जनक जी के संताप को मिटाया ।इसके विवाह की इस आकर्षण  लीला को देखकर दर्शकों ने कलाकारों की सराहना की।