अनुराग लक्ष्य, 19 फरवरी
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
इलाहाबाद प्रयागराज की धरती यूँ तो शिक्षा और धार्मिक नगरी के लिए विख्यात है लेकिन इस शहर के गोशे गोशे में साहित्य, राजनीति, संगीत, कला और अदब को भी बखूबी महसूस किया जा सकता है।
उसी फेहरिस्त में एक नाम आता है कवियित्री स्मिता मालवीय का जो अपनी उत्कृष्ट रचनाओं और अपनी बेहतरीन गायिकी से अपने आप को साहित्य प्रेमियों के दिलों में जगह बनाने में सफल हो चुकी हैं। आज हम उन्हीं की एक उत्कृष्ट रचना से आपको रूबरू कराते हैं।
मेरे हृदय का उदगार है
मैं अपनी अनुभूतियों को
अपनी कविताओं के द्वारा
व्यक्त करना चाहती हूँ।
शायद मैं अपनी बात तुम्हें
यूँ बोलकर न समझा पाऊं ।
क्योंकि मैं अपनी बात तुम्हारी तरह
शब्दों में ढालना नहीं जानती ।
तुम बहुत कुछ कह जाते हो
शब्दों से खेलकर शब्दों के द्वारा ।
परन्तु मैं विवश हूँ तुम्हें समझा पाने में,
काश मेरे कुछ कहे बिना,
तुम मेरी संवेदना और, मेरे अंतर्मन की वोह पीड़ा,
जो मैं तुम्हे कब से समझने की कोशिश कर रही हूँ।