🪴🪴 ओ३म् 🪴🪴
*वाटसप गुरुकुल कक्षा-९*
गतांक से आगे …………कल भी हमने *ब्रह्माण्ड के तीसरे पदार्थ बुद्धि का ही विश्लेषण किया था। पहली बात बुद्धि भी प्रकृति,शरीर व मन की तरह ही एक जड़ पदार्थ है।क्योंकि प्रकृति जड़ है अत: उससे जो भी पदार्थ बनेगा वो जड़ ही होगा।प्रकृति से अपने आप कोई पदार्थ नहीं बनता।कोई चेतन पदार्थ ही बना सकता है।चेतन पदार्थ भी दो हैं* एक परमात्मा दूसरा जीवात्मा। मूल पदार्थों को केवल परमात्मा ही बना सकता है।बुद्धि भी मूल पदार्थ है अत: बुद्धि को भी परमात्मा बनाता है। मनुष्य की पहचान केवल उसकी बुद्धि है। योगेश्वर श्रीकृष्ण चंद्र जी महाराज बुद्धि के महत्व को समझाते हुए पार्थ!अर्जुन से कहते हैं
*बुद्धि नाशात्प्रणश्यति*: हे अर्जुन! बुद्धि नष्ट होते ही मनुष्य भी नष्ट हो जाती है।जिस मनुष्य की बुद्धि नष्ट हो जाती है फिर वो *अधर्म,पाखंड,अंधविश्वास,आडंबर* में लिप्त हो जाता है।
*🌹धर्म जिज्ञासा*🌹
मनुष्य की बुद्धि बिगड़ती कैंसे हैं?
🦚 *सम्यक् समाधान*🦚
चार प्रकार से मनुष्य की बुद्धि पतित हो जाती है।
*[१] गलत संगति* जैंसे मंथरा की कु-संगति से माता कैकेयी की।शूर्पणखां की कु-संगति से लोक नायक रावण।मामा शकुनि की कु-संगति से दुर्योधन न दुर्योधन की कु-संगति से दानवीर कर्ण की बुद्धि नष्ट हो ग ई।अत:कु-संगति से सदा बचें।
*[२] भ्रम से* हिरण रेगिस्थान में सूर्य की किरणों से चमकती बालू को जल समझकर भटकता रहता है।अंधेरे में खंबे में भूत का और रस्सी में सर्प का भ्रम हो जाता है।वैंसे रंग बिरंगी मूर्तियों में लोगों को ईश्वर का भ्रम हो जाता है।बिल्ली कभी प्लास्टिक के चूहे को नहीं मारती।भोंरा कागज के फूलों पर नहीं बैठता मगर भ्रमित बुद्धि वाला भी *कण-कण में भगवान की सर्व्यापकता को न देख कण-कण को भगवान समझकर भ्रम में* में पड़ा रहता है।
*[३] इंद्रिय दास बनने से* जिस व्यक्ति का अपनी जिह्वा,आंख,नाक,वाणी,स्पर्श पर नियंत्रण नहीं होता उसकी बुद्धि पतित हो जाती है फिर वह *कौए की तरह सर्वभक्षी* हो जाता है।
*[४] जमाने की हवा* बच्चे घर में रहते हैं।अच्छे भले रहते हैं।बचपन में माता-पिता के साथ सत्संग में भी जाते हैं।परंतु *स्कूल,कालेज* जाते ही जमाने की हवा लग जाती है।फिर देर से सोना।देर तक जगना,घूमना-फिरने की बीमारी लग जाती है। क ई मातायें बहनें बहुत अच्छी होती हैं मगर *साश-बहू व अनुपमा सीरियलों* को देखकर बहक जाती हैं।
अत: सदा सत्संग,सेवा,परोपकार,संध्या,साधना,संयम,स्वाध्याय करते रहेंगे तो बुद्धि ठीक रहेगी।इसी के साथ *ब्रह्माण्ड के तीसरे तत्व बुद्धि* का प्रकरण भी पूर्ण हुआ। शेष कल….. … …….
आचार्य सुरेश जोशी
*वाटसप गुरुकुल महाविद्यालय*आर्यावर्त साधना सदन दशहराबाग बाराबंकी।