साधना भक्ति व विद्वता के चलते श्रीरामभक्ति की मधुशाखा के अनमोल रत्‍‌न बने स्वामी युगलानन्य शरण

 

अयोध्या। सिद्ध पीठ स्थित लक्ष्मण किला मे न केवल साधना बल्कि अपनी विद्वता के चलते श्रीरामभक्ति की मधुशाखा के अनमोल रत्‍‌न बने स्वामी युगलानन्य शरण को उनकी 144 वीं पुण्यतिथि पर उनकी तपोस्थली लक्ष्मण किला में समारोहपूर्वक श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर गुरुधाम स्थित आचार्य के चित्र पर माल्यार्पण कर व्यक्तित्व-कृतित्व पर प्रकाश डाला गया।श्री बल्लभ बिहार वर विभव विधायक, श्री सद्गुरु सुपकंद कला कमनीय प्रदायक, बंदौ विसद विनोद मोद मंदिर पद गायन, श्री गुरुवर विज्ञान भवन अज्ञान न सावन गिरा गंभीर विचित्र विमल बोले मुनि गायक आदि पदों गायन के साथ आचार्य शिरोमणि स्वामी युगलानन्य शरण के द्वारा रचित युगल विनोद पाठ भगवान श्री राम की नगरी की प्रधानतम में सिद्ध पीठ लक्ष्मण किला में किया गया।
वर्तमान पीठाधीश्वर महंत मैथिली रमण शरण ने बताया कि नामकांति रूपकांति लीलाकांति व धामकांति का पंचदिवसीय अनुष्ठान मंदिर प्रांगण में किया गया। अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण ने बताया कि संपूर्ण भारत में मधुरोपासना के परमाचार्य और उसके सिद्धांत कार स्वामी
युगलानन्य शरण महाराज की 144 पुण्यतिथि पर संतों का भंडारा किया गया स्वामीजी काशी की ज्ञान यात्रा करते हुए अयोध्या में निर्मली कुंड पर निवास किया और बाद में कंपनी सरकार ने उनकी तपस्या के करण 52 बिघे जमीन दिए थे उसी जगह पर यह लक्ष्मण किला विद्यमान है।अयोध्या में ही नहीं पूरे भारत में सीताराम उपासना में किशोरी जी को प्रधान मानकर के जो उपासना हुई उसके करमाचार्य स्वामी जी के भंडारे में संतों ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।इस अवसर पर मणिराम छावनी उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास,जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, महंत गौरीशंकर दास, महंत बलराम दास, मंहत राम कुमार दास, महंत जनार्दन दास, हनुमानगढ़ी के प्रधान पुजारी पार्षद रमेश दास, ,मंहत राजू दास, मधुकरिया संत एमबी दास,अयोध्या विधायक वेद प्रकाश गुप्ता सहित सैकड़ो की संख्या में संत महंत राजनेता भक्तगणों ने महाराज जी को श्रद्धांजलि अर्पित की अतिथियों का स्वागत सूर्य प्रकाश शरण ने किया।