स्कैम मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, बेंगलुरु और मैसूर में 9 जगहों पर की छापेमारी

बेंगलुरु ,28 अक्टूबर प्रवर्तन निदेशालय ने कथित मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (मुडा) घोटाला (रूष्ठ्र ह्यष्ड्डद्व) मामले में बेंगलुरु और मैसूर में 8 से 9 जगहों (श्वष्ठ ह्म्ड्डद्बस्रह्य द्बठ्ठ क्चद्गठ्ठद्दड्डद्यह्वह्म्ह्व ड्डठ्ठस्र रू4ह्यशह्म्द्ग) पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनके परिवार और मुडा अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और जमीन की हेराफेरी के आरोपों की बीच हुई है।
श्वष्ठÓह्य ड्ढद्बद्द ड्डष्ह्लद्बशठ्ठ द्बठ्ठ रूष्ठ्र ह्यष्ड्डद्व ष्ड्डह्यद्ग, ह्म्ड्डद्बस्रह्य ड्डह्ल 9 श्चद्यड्डष्द्गह्य द्बठ्ठ क्चद्गठ्ठद्दड्डद्यह्वह्म्ह्व ड्डठ्ठस्र रू4ह्यशह्म्द्ग : मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण को शॉर्ट फॉर्म में रूष्ठ्र कहते हैं। जब सरकार किसी जमीन का अधिग्रहण करती है तो मुआवजे के तौर पर दूसरी जगह जमीन देती है। पूरा कथित रूष्ठ्र स्कैम भी इसी से जुड़ा है। ये मामला सिद्धारमैया की पत्नी बीएम पार्वती को मुआवजे के रूप में मिली 14 प्रीमियम साइट से जुड़ा है। 2004 से यह मामला रूष्ठ्र की ओर से उस समय मुआवजे के तौर पर जमीन के पार्सल के आवंटन से जुड़ा है जब सिद्धारमैया मुख्यमंत्री थे।
ये प्लॉट मैसूर में हैं। आरोप है कि सिद्धारमैया और उनकी पत्नी पार्वती ने रूष्ठ्र से गैरकानूनी तरीके से जमीन ली। दावा है कि इसमें 4 हजार करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। जिस जमीन की यहां बात हो रही है वो केसारू गांव की 3.16 एकड़ का प्लॉट है। साल 2005 में इस जमीन को सिद्धारमैया के बहनोई मल्लिकार्जुन स्वामी देवराज को ट्रांसफर कर दिया गया था।
दावा है कि मल्लिकार्जुन स्वामी ने 2004 में सरकारी अफसरों और जाली दस्तावेजों की मदद से इस जमीन को अवैध रूप से अपने नाम करवा लिया था। आरोप है कि रूष्ठ्र ने मैसूर की प्राइम लोकेशन पर पार्वती को जमीन दी। ये जमीन 14 अलग-अलग जगहों पर थी। दावा है कि सिद्धारमैया की पत्नी को उन इलाकों में जमीन दी गई, जहां सर्किल रेट ज्यादा था, जिससे उसकी कीमत केसारू की असल जमीन से ज्यादा हो गई।