🪷 ओ३म् 🪷
*करवाचौथ व्रत पक्षपात है।*
जी हां मित्रो! चौंकिये मत।पहले शांत चित्त होकर *अपनी बुद्धि लगाकर लेख को पढ़िए सब समझ में आ जायेगा* ?
यह नारि जाति के साथ बहुत बड़ा पक्षपात है उन धर्म के ठेकेदारों का जिन्होने इस काल्पनिक व्रत को पिछले *३०-३६* वर्षों मे चलाया है। इस व्रत की कहानी है कि इसके करने से पति की आयु बढ़ती है! अब जरा विचार कीजिए अगर आयु बढ़ती है और पत्नी मर ग ई तो पति उस बड़ी हुई आयु का क्या करेगा? होना तो यह चाहिए कि पति भी व्रत करे कि जिससे पत्नी की भी आयु बड़े। अब ये पत्निया इतनी भोली हैं कि इनको ऐसा प्रश्न करने में भी डर लगता है कहीं *पुरुष प्रधान समाज विद्रोह न खड़ा कर दे* दूसरी बात यदि पति जुआरी,शराबी,दुराचारी,आतंकवादी,चोर,डाकू हो उसके लिए पत्नी आयु बढ़ाकर क्या लाभ पायेगी? क्योंकि ऐसा पति तो पत्नी के लिए *सिर दर्द* के सिवा कुछ भी नहीं है।और यदि पति महोदय *धर्मात्मा,सदाचारी,जीतेन्द्रिय, परोपकारी,विद्वान* है तो उसकी आयु अपने आप बढ़ जायेगी चाहे करवा चौथ का व्रत करे या न करे! अब आप अपने हृदय पर हाथ रख कर कहिए कि यह *करवा चौथ व्रत पुरुष प्रधान समाज का नारी जाति के लिए पक्षपात* है या नहीं।
🌸 *यमराज कौन?*🌸
इस व्रत के लिए एक काल्पनिक कथा चलाई है कि जिस स्त्री ने ये व्रत किया उसका पति मर गया था मगर उसने यह व्रत करके यमराज से अपने पति के प्राण वापस मांग लिए।यमराज उसके व्रत से खुश होकर उसके पति की आयु बढ़ा दिया वो जीवित हो उठा!
मित्रों सारे झगड़े की फसाद तो *यमराज* है। हिंदू समाज का दुर्भाग्य यह है कि यह अपनी मूल भाषा *संस्कृत को न जानता है।न पढ़ता है।न ही पढ़ना चाहता है* इसीलिए काल्पनिक दुनियां में जीता है। 👺 यमराज भैंसे पर बैठकर आता है प्राणों को खींचकर 👺 ले जाता है।ऐसी कहानियां सुन सुनाकर हिंदू जाति आज *कायर,डरपोक बनकर शास्त्र विधि से हटकर मन माना पूजा,पाठ,जप,तप करती है*। सत्यता यह है कि *यम कहते हैं विद्वान को! ऐसा विद्वान जिसने मृत्यु पर विजय पा ली है।जिसकी अविद्या नष्ट हो ग ई है।योग विद्या से जिसने तत्वज्ञान द्वारा मृत्यु को अपने वश में कर लिया है उस विद्वान को यम/यमराज/या यमाचार्य* कहते हैं।ऐसे यमराज वा यमाचार्य के पास बैठकर जो स्त्री वा पुरुष विद्या पढ़ते हैं वो भी मृत्यु को जीत लेते हैं।
संस्कृत विद्या से हीन पाखंडियों ने यमराज के अर्थ को नहीं समझा।काल्पनिक अर्थ करके हिंदू जाति को *भीरु,पंडे-पुजारियों* का मानसिक गुलाम बना दिया है।
वैदिक *सनातनसंस्कृति* के प्रामाणिक ग्रंथ चार वेद🪔छ: शास्त्र🪔११ उपनिषद🪔महर्षि पाणिनि कृत व्याकरण🪔ब्राह्मण ग्रन्थ🪔मनुस्मृति🪔 महाभारत🪔 महर्षि बाल्मीकि रामायण में कहीं भी 🪔 *करवाचौथ* 🪔 नाम का व्रत नहीं है।
हिंदुओं के जो ग्रंथ हैं गीता📚 रामचरितमानस📚 सत्यनारायण व्रत📚 हनुमान चालीसा📚 में भी 🌸 *करवाचौथ* 🌸 व्रत नहीं है। फिर भी हिंदू पुरुष प्रधान लोग *करवाचौथ व्रत* का विधान नारी जाति से करवाते हैं क्या ये पक्षपात नहीं है?
एक आश्चर्य और भी है वैदिक कालीन नारियां जैंसे माता कुंती🧘 जीजाबाई🧘रानी लक्ष्मीबाई🧘माता सीता🧘🌞 सूर्य 🌞को अभिवादन करती थी मगर चंद्रमा को देखने की परंपरा नहीं रही। यही नहीं यह सृष्टि नियमों के भी विपरीत है। सृष्टि का नियम है *दिन में काम करो व रात में आराम करो! कोई भी पूजा -पाठ रात्रि में नहीं होती!* अभी तक यह पता नहीं चला कि कब से? किसने? किस शास्त्र के आधार पर यह 🪔 *करवाचौथ* 🪔 ब्रत चलाया?
अब यह देखते हैं कि नारियों के बारे में *सनातन वैदिक शास्त्रों* में क्या लिखा है?
*🪷माता गांधारी*🪷
महाभारत में माता गांधारी कहती हैं।
योगेन शक्ति: प्रभवेन्नराणां।
पातिब्रतेनापि कुलांगनानाम्।।
अर्थात् नर योग द्वारा जो शक्ति अर्जित करते हैं, पतिब्रता,कुलांगनाओं को वह केवल पति की सेवा से प्राप्त हो जाती है।
*मनु-स्मृति ५/१५५*
स्त्रियों के लिए पति से भिन्न न कोई यज्ञ है न कोई ब्रत है न किसी उपवास का ही विधान है।पति की सेवा से ही पत्नी स्वर्ग का आनंद प्राप्त करती है। *महात्मा तुलसी*
तुलसी दास जी ने रामचरित मानस में लिखा है कि संसार में चार प्रकार की स्त्रियां होती हैं।
🌴🌴🌴[१]🌴🌴🌴
उत्तम के अस बस मन माहीं।सपनेहुं आन पुरुष जग माहीं।
🌴🌴🌴[२]]🌴🌴🌴
मध्यम पर पति देखहिं कैंसे।
माता-पिता पुत्र निज जैंसे।
🌴🌴🌴[३]🌴🌴🌴
धर्म विचार समुझि कुल रह ई।
जानेहु अधम नारि जग सोई।।
🌴🌴🌴[४]🌴🌴🌴
बिनु अवसर भय के रह जोई।
जानेहु अधम नारि जग सोई।।
*महर्षि बाल्मीकि*
महर्षि बाल्मीकि जी ने अयोध्या काण्ड सर्ग ११७/२३ में लिखा है।
*नगस्थो वनस्थो वा शुभो वा यदि वा शुभ:।*
*तासा स्त्रीणां प्रियो भर्ता तासां लोका महोदया* ।।
अर्थात् पति चाहे नगर में हो या वन में।शुभ अवस्था में हो या अशुभ । जिन स्त्रियों को अपना पति प्रिय है उसके सभी लोक महिमाशाली होते हैं।
*माता सीता जी*
विदितं तु ममाप्येत यदयथा नार्या: पतिगुर्रू:
माता सीता जी वनवास के समय श्री राम से कहती हैं।हे आर्य पुत्र! मैं यही जानती हूं कि नारी का गुरु पति ही है।
*माता-अनसूया*
जब माता सीता अत्रि मुनि के आश्रम पहुंची तो उनकी पत्नी माता अनसूया माता सीता को पातिव्रत धर्म की शिक्षा देते हुए कहा!
🌲🌲🌲🌲🌲🌲
*स्त्रीणामार्य स्वभावानां परमं दैवतं पति: ।*
अयोध्या काण्ड सर्ग ११७/२४..
हे सीते! आर्य स्वभाव वाली स्त्रियों के लिए पति ही परं देवता है।
*घोर अन्याय!!*
तीज का व्रत नारी करें! 🦩वट सावित्री भी नारी करे!🦩 करवाचौथ 🦩भी नारी करे! निर्जला भी नारी करे! 🦩पुरुषों के लिए *एक भी व्रत नहीं* इसी से पता चलता है कि ये शास्त्र सम्मत व्यवस्था नहीं है।नारी के साथ नर द्वारा किये जाना वाला मानसिक मानसिक शोषण है।पुरुषों की यह व्यवस्था सभ्य समाज के प्रतिकूल है और *सनातन संस्कृति* पर प्रश्न चिन्ह है। फिर भी इसमें जो परिवर्तन किया जा सकता है उस पर चिंतन दिया जाता है।
*करना क्या है ?*
आज के करवाचौथ पर दोनों पति-पत्नी आपस में कुछ व्रत अवश्य करें!
*[१]* एक- दूसरे से झूठ नहीं बोलेंगे।
*[२]* प्रतिदिन प्रातःकाल उठकर एक दूसरे को नमस्ते करेंगे।
*[३]* प्रतिदिन दोनों पति-पत्नी मिलकर संध्या करेंगे।
*[४]* प्रतिदिन दोनों पति-पत्नी मिलकर यज्ञ करेंगे।
*[५]* अपने -अपने माता-पिता आचार्य और अतिथियों के साथ कोई भेदभाव नहीं करेंगे।
*[६]* देश धर्म जाति के लिए तन-मन-धन से यथाशक्ति,यथासामर्थ्य बलिदान करेंगे।
*[७]* अपने पति का बीड़ी,सिगरेट,गुटका छुड़वायेंगे!
*[८]* शराब,जुआं,भांग आदि नशा छुड़वायेंगे!
*[९]* अपनी पाकशाला (किचन) से पांच जहर *सफेद नमक,सफेद चीनी,सफेद मैदा,सफेद सूजी,सफेद रिफाईंड* आज ही हटा देंगे!
*[१०]* अपने घर पर *वैदिक विद्वानों* से ही कर्मकांड करवायेंगे और वैदिक सत्संग ही करेंगे।
यदि उपरोक्त व्रतों को छोड़कर केवल भूखा रहने वाले व्रत का मतलब है कुछ *गोल-माल* है।
आशा है इस बार के *करवा चौथ* पर आप सत्य को जानेंगे और सभी को जनायेंगे! आप इस पर्व पर सपरिवार यज्ञ /सत्संग करें और *सच्चे सनातन वैदिक धर्म* को समझें। आपको सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं!
*ओ३म्*
आचार्य सुरेश वैदिक
प्रवक्ता एवं पंडिता
रुक्मिणी शास्त्री वैदिक भजनोपदेशिका
आर्यावर्त साधनासदन
पटेल नगर दशहराबाग
बाराबंकी उ० प्रदेश।।