नगर में धर्मांतरण का भंडाफोड़, दो पादरी हिरासत में

सुल्तानपुर महुअरिया मोहल्ले में एक बार फिर गुप्त असेंबली में गरीबों और पिछड़ों को धर्मांतरण के लिए निशाना बनाते हुए पकड़ा गया। दो पादरियों को हिरासत में लिया गया है। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि इस धर्मांतरण अभियान को विदेशी फंडिंग का समर्थन प्राप्त था, जिससे प्रभावित लोगों को आर्थिक और चिकित्सा सहायता का लालच दिया जा रहा था।
गौरतलब है कि पिछले महीने भी पुलिस ने इसी तरह की गतिविधियों में शामिल कुछ लोगों को हिरासत में लिया था। उन मामलों की सही जांच नहीं हो पाई, जिससे यह धर्मांतरण नेटवर्क अब भी सक्रिय बना हुआ है। यदि पुलिस इस बार तह तक जाए तो पूरे षड्यंत्र की सटीक जानकारी सामने आ सकती है। धर्मांतरण की इस घटना में सुल्तानपुर के चर्च और क्रिश्चियन हॉस्पिटल्स की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है, जहां विशेष रूप से कमजोर वर्गों को निशाना बनाया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क कई महीनों से सक्रिय है और इसकी जड़ें सैम हिगिनबॉटम यूनिवर्सिटी से भी जुड़ी हो सकती हैं, जहां पहले से धर्मांतरण के आरोप लगे हुए हैं।
’धर्मांतरण के लिए विदेशी फंडिंग का उपयोग’
सुल्तानपुर में सामने आए इस मामले में विदेशी फंडिंग का प्रमुख रोल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों को आर्थिक सहायता और मुफ्त चिकित्सा का प्रलोभन देकर ईसाई धर्म में परिवर्तित करना है। पिछले महीनों में हुई गिरफ्तारियों और अब इस नए मामले से यह साफ हो गया है कि देश में धर्मांतरण का एक बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा है। इस मामले पर पुलिस की गहन जांच से यह संभावना बढ़ गई है कि यदि ठीक से जांच की जाए, तो बड़े पैमाने पर धर्मांतरण के पीछे काम कर रहे लोगों और विदेशी फंडिंग के बारे में अहम जानकारी हाथ लग सकती है।