

मिर्जापुर में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सम्पन्न, कवियों-शायरों ने बांधा शमां
बस्ती। जेनेक्स होटल फनसिटी कंपाउंड मिर्जापुर में प्रख्यात कवि डॉ0 ज्ञानेन्द्र पांडे ‘सरल’ जिला आबकारी अधिकारी मिर्जापुर की प्रकाशित कृति ‘श्वेत शिलाएं’ का लोकार्पण किया गया। उक्त अवसर पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि दिल्ली से पधारे डॉ0 राधेश्याम बंधु ने किया एवं संचालन राष्ट्रीय कवि डॉ0 रामकृष्ण लाल जगमग ने किया।
लोकार्पण समारोह में डॉ0 प्रीति कौशिक ने पुस्तक की समीक्षा करते हुए कहा कि डॉ0 ज्ञानेन्द्र पांडे ‘सरल’ की इस कृति की सभी कविताएं कालजयी हैं। सभी कविताएं हृदय को स्पर्श करती हैं। डॉ0 राधेश्याम बंधु ने कहा कि पाण्डेय जी की यह कृति अपने युग का दस्तावेज है। डॉ0 डॉ रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ ने कहा कि पाण्डेय की यह कृति हृदयस्पर्शी, मर्मस्पर्शी के साथ-साथ क्षितिज स्पर्शी भी है। उन्होंने प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच समय निकालकर जो सृजन किया है वह अति प्रशासनीय है।
लोकार्पण समारोह के पश्चात आयोजित कवि सम्मेलन में देश के कोने-कोने से पधारे कवियों ने अपनी कविताओं से ऐसा समां बांधा कि श्रोता भावविभोर हो गए। डॉ0 हेमा पांडे की सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। डॉ0 विनोद उपाध्याय ने अपनी कई गजलों को मनमोहक अंदाज में सुनाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया। उनकी पंक्तियां-‘‘अदब के लिहाज से खामोश हो गया, वरना तेरे सवाल का बेहतर जवाब था’’ विशेष सराही गई। महेश श्रीवास्तव ने मुक्तकों और कई रस की कविताएं सुनाकर वातावरण को खूबसूरत बना दिया, उनकी पंक्तियां-‘‘घर में जिन्हें नसीब नहीं चीनी की चाय, महफिल में वह जाकर रसगुल्ला खोजते हैं’’ सराही गई। डॉ0 ज्ञानेन्द्र पाण्डेय ‘सरल’ ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को ताली बजाने को विवश कर दिया, उनकी पंक्तियां-‘‘हे केशव अब आ जाओ’’ वर्तमान विसंगतियों पर प्रहार करती हुई कृष्ण को धरा पर आने का आवाहन किया। जिस पर श्रोताओं की विशेष वाह-वाही मिली। डॉ0 ओपी वर्मा ‘ओम’ की ओज की कविताओं ने श्रोतओं के हृदय में राष्ट्र चेतना का संचार किया। डॉ0 अंजना कुमार एवं डॉ0 हेमा पांडे के श्रृंगारपरक गीतों ने कवि सम्मेलन को ऊंचाई प्रदान की। संचालन कर रहे डॉ0 जगमग ने श्रोताओं को हास-व्यंग्य रचनाओं से जहां हंसाया वहीं गंभीर रचनाओं से श्रोताओं को चिंतन की दिशा प्रदान की। अध्यक्षता करते हुए डॉ0 राधेश्याम बंधु ने अपनी समसामयिक रचनाओं से खूब वाहवाही बटोरी। उनकी पंक्तियां-‘‘आदमी कुछ भी नहीं फिर भी वतन की शान है, हर अंधेरी झोपड़ी की वह स्वयं दिनमान है, जब पसीने की कलम से वक्त खुद गीता लिखे, एक ग्वाला भी कभी बनता स्वयं भगवान है।’’ डॉ0 ज्ञानेंद्र त्रिवेदी ‘दीपक’ की पंक्तियां-‘‘हम तो दरिया के सीने पर तरबूज की खेती करते हैं’’ को विशेष सराहना मिली। श्रीमती भूमिका पांडे व अनन्य पांडे की रचनओं कीं विशेष प्रशंसा की गई।
उक्त अवसर पर डॉ ज्ञानेन्द्र पाण्डेय ‘सरल’ को गौरवांजलि संस्था भूटान द्वारा अंतर्राष्ट्रीय साहित्य गौरव सम्मान, भारतीय सेवा संस्थान दिल्ली द्वारा भारत श्री सम्मान, शब्द सुमन द्वारा मुक्तिबोध सम्मान के अतिरिक्त अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया। साथ ही सभी कवियों को भी सम्मानित किया गया।
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में भारी संख्या में लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में राज किशोर सिंह, सुनील कुमार श्रीवास्तव, अजय कुमार गौड,़ अश्वनी कुमार पाण्डेय, राहुल रावत, सौरभ वर्मा, पूनम श्रीवास्तव, अरविंद वर्मा, तेजस पाण्डेय, अनन्य पाण्डेय ने कवियों का माल्यार्पण किया।