ईश्वर शक्ति है व्यक्ति नहीं – आचार्य सुरेश जोशी

🔥🔥 ओ३म् 🔥🔥
🌋 *ईश्वर शक्ति है व्यक्ति नहीं*🌋
आज धरती पर सबसे अधिक झगड़े *ईश्वर* के नाम पर हैं! कोई कहता है *ईश्वर चौथे आसमान* पर है। कोई कहता है *ईश्वर सातवें आसमान* पर है। कोई कहता है *ईश्वर वैकुंठ में* है। कोई कहता है *ईश्वर गोलोक* में है।इसी से परेशान होकर क ई लोग कहते हैं *ईश्वर है ही नहीं* ये केवल कल्पना है। कोई कहता है *ईश्वर निराकार* है तो कोई कहता है *ईश्वर साकार* है। इससे परेशान होकर क ई कहते हैं कि *ईश्वर न साकार है,न निराकार है वो तो बिल्कुल बेकार* है।
🪷 ईश्वर के नाम पर झगड़ा 🪷
*रुप का झगड़ा,नाम का झगड़ा। स्थान का झगड़ा है।। भक्त कहाने वालों में भगवान का झगड़ा है।।१।।*
*ईश्वर, अल्ला,राम ,गौड शब्दों पर लड़ते हैं।बाहर के चिह्नों को लेकर लोग झगड़ते हैं।दीन, पंथ,मत-मजहब व ईमान का झगड़ा है। भक्त कहाने वालों में भगवान का झगड़ा है।।२।।*
🌻 सत्य -जिज्ञासा 🌻
*वास्तव में ये सही बात है मगर समस्या ये है कि इस समस्या का समाधान क्या है?*
🌹 सम्यक उत्तर 🌹
*यदि हम ईश्वर की यथार्थ व सत्य परिभाषा स्वयं जानें और सबको पक्षपात छोड़कर बतावें तो समाधान खुद ही सामने उपस्थित हो जायेगा?*
🌻 सत्य -जिज्ञासा 🌻
*तो बतायें कि ईश्वर की सही परिभाषा क्या है जिसे मानव मात्र सहज भाव से स्वीकार कर लें?*
🌹 सम्यक उत्तर 🌹
*ईश्वर कोई व्यक्ति नहीं है वो एक सर्वशक्तिमान,सर्वज्ञ, सर्वांतर्यामी, सर्वव्यापक , निराकार शक्ति है।*
🌻 सत्य -जिज्ञासा 🌻
*ईश्वर व्यक्ति नहीं शक्ति है कृपया इसे विस्तार से समझायें?*
🌹 सम्यक उत्तर 🌹
*जी। बहुत अच्छा प्रश्न है आपका! ध्यान से उत्तर को पढ़ें आपके समझ में आ जायेगा कि 🧘 ईश्वर व्यक्ति नहीं शक्ति 🧘 है। सबसे पहले तो आप इतिहास से जान लें कि महाभारत काल से पहले पूरे भूमंडल पर ईश्वर को एक शक्ति के रूप में ही माना व जाना जाता था इसलिए तब भारत विश्वगुरू के रूप में प्रसिद्ध था।*
शक्ति को को विज्ञान की भाषा में *ENERGY* कहा जाता है। शक्ति का कोई आकर नहीं होता है वो निराकार होती है। आज जो चारों ओर अशांति है उसका एकमात्र कारण ईश्वर को व्यक्ति मानकर उसकी पूजा की जाती है। हिंदुओं में वो व्यक्ति *श्रीराम, श्रीकृष्ण, भगवान शंकर आदि के रूप में पूजे जाते हैं।इतना ही नहीं हिंदुओं में भगवान स्त्रीलिंग में भी हैं जैसे माता दुर्गा,माता काली,माता कामाख्या आदि।।*
मुसलमानो में उसे *पीर, पैगम्बर, औलिया, फ़रिश्ते के रूप में पूजा जाता है।।*
ईसाइयों में *मूसा ईशा, पादरियों* ने तो *बौद्धों में बुद्ध* जैनियों में *तीर्थंकर नेमि महावीर* सिक्खों में *गुरुग्रंथ* आदि सब व्यक्ति को ईश्वर मानकर पूजते हैं और इस बात के लिए लड़ते -मरते है कि हमारे ही *महापुरुष सच्चे ईश्वर हैं शेष दूसरे नंबर पर हैं इसी बात पर अनेकों मत,पंथ, मजहब, सम्प्रदाय,मठ, मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारे,पीठ, अखाड़े बने हैं और पहलवानों कर रहे हैं कि हम ही सच्चे व अच्छे हैं।शेष बेकार हैं हम उन्हें नेस्तनाबूत करके ही दम लेंगे।*
आज जो धर्म के नाम पर *जेहाद,आतंक,उग्रवाद ,चरमपंथ या वाममार्ग चल रहा है उसका एक ही कारण है कि ईश्वर शक्ति नहीं व्यक्ति है।।*
ईश्वर व्यक्ति नहीं शक्ति है कहने का मतलब है कि आज दुनियां में जितने भी *महापुरुष,पीर, पैगम्बर, फ़रिश्ते, धर्म गुरु, उस्ताद, अवतार, विश्व गुरु बनकर घूम रहे हैं उनके शरीर,मन, बुद्धि को बनाने वाला परमात्मा कोई व्यक्ति नहीं अपितु एक निराकार, सर्वशक्तिमान सर्वज्ञ सर्वांतर्यामी सर्वव्यापक शक्ति ईश्वर है।।*
यह *शक्ति* ही सबको देखने के लिए आंख, सुनने के लिए कान, चलने के लिए पैर ,गति के लिए प्राण व शरीर में इन अवतारों, फरिश्तों, धर्म गुरुओं, साकार नारायण हरि जैसे मनुष्यों के शरीर में आत्मा का संयोग – वियोग करती है।
यदि इस शक्ति को लोग समझ जायेंगे तो फिर *व्यक्तियों को ईश्वर मानना बंद हो जायेगा।जब व्यक्तियों को ईश्वर मानना बंद हो जायेगा तब। *धरती पर न मंदिर होगा ,न मस्जिद होगी,न गुरुद्वारा होगा,न चर्च होगी,न मठ होगा न काबा होगा।न मक्का-मदीना न योरोशलम न अयोध्या न हरिद्वार न पुण्य शिला तब केवल 🦚 मन मंदिर होगा उसमें केवल मानव व उसकी मानवता होगी 🦚 तब यह संसार स्वर्ग हो जायेगा। तब व्यक्ति तो अनेक होंगे मगर शक्ति एक ही होगी ईश्वर।।*
आओ संपूर्ण विश्व में 🌸 *सुख 🌸 शांति और 🌸 आनन्द का संचार करने के लिए* ईश्वर व्यक्ति नहीं शक्ति है का संदेश विश्व को देने में सहयोग करें और पुनः भारत को एक बार *विश्व गुरु* के स्थान पर प्रतिस्थापित करें। अगर हम ईश्वर को व्यक्ति मानकर ही पूजते रहे तो *भारत का विश्व गुरु* होना एक दिशा स्वप्न है। हजारों योगी और मोदी आयेंगे व जायेंगे अगर व्यक्ति को ईश्वर मानते रहे तो भारत को विश्व बनने का ख्वाब केवल ख्वाब बनकर रह जायेगा। इतिहास उठाकर कर पढ़ लो। *जब भारत विश्व गुरु था* तब न मठ थे।न मंदिर थे।न मस्जिद थे।न गुरुद्वारा थे।न बोद्ध विहार थे। केवल मानव व मानवता थी ।सभी लोग *निराकार शक्ति के उपासक थे व्यक्ति* के नहीं। इसलिए हम गर्व के साथ कहते हैं कि ईश्वर व्यक्ति नहीं शक्ति है।
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आचार्य सुरेश जोशी
*वैदिक प्रवक्ता*
आर्यावर्त साधना सदन पटेल नगर दशहराबाग बाराबंकी उत्तर प्रदेश।