🌺 *ओ३म्*🌺
📚 ईश्वरीय वाणी वेद 📚
🌹 वेदों में गृहाश्रम 🌹
*ओ३म् इहैव स्तं मा वि यौष्ठं विश्वमायुव्यर्श्नुतम्।क्रीळन्तो पुत्रैर्नप्तृभिमोर्दमानौ स्वे गृहे। ऋग्वेद १०-८४-४२*
🦚 *मंत्र का पदार्थ*🦚
🦩 इस एव = यहीं 🦩 = तुम दोनों रहो। 🦩 मा वियौष्टम् = तुम दोनों वियोग मत करो, अलग -अलग न रहो। 🦩विश्वम् आयु: =< पूरी आयु को 🦩व्यश्नुतम् = तुम दोनों भोगों 🦩 पुत्रै:= पुत्रों के साथ 🦩नप्तृभि: = नातियों के साथ 🦩 क्रीळन्तौ = तुम दोनों खेलते हुए 🦩 स्वे गृहे = अपने घर में 🦩मादमानौ= तुम दोनों आनंद करते हुए!
💐 *मंत्र की मीमांसा*💐
वेदों में गृहस्थ विज्ञान को बताने वाले अद्भुत मंत्र है। सबसे रहस्यमय बात यह बताई कि *क्रीळन्तौ और मोदमानी* अर्थात् वैदिक विज्ञान कहती है कि एक पुरुष का एक ही स्त्री के साथ ही विवाह होना चाहिए। सृष्टि संचालक परमात्मा ने सृष्टि संविधान में *बहु विवाह* को अवैदिक बताया है। सम्भव है कि *उच्छृंखल राजाओं ने* अपनी शक्ति के घमंड में शास्त्रकारों को विशेष व्यवस्था देने पर वाध्य किया हो और,
🏹 *समरथ को नहीं दोष गुसाईं 🏹* का सिद्धांत धर्म में शामिल कर लिया गया हो। परंतु *बहुपति -भाव* तो संसार में लगभग नहीं के बराबर है किसी अपवाद को छोड़कर।
इतिहास के दो उदाहरणों को पर्याप्त मानता हूं वेद मंत्र की बात को पुष्टि करने के लिए।
(१) छत्रपति शिवाजी महाराज की तीन पत्नियां थीं। दूसरी पत्नी *स ई देवी* से बीर संभाजी का जन्म हुआ। कुछ ही दिनों में देवी स ई का निधन हो गया।अब बची दो रानियां *सबसे बड़ी रानी व छोटी रानी पुतला बाई* संभाजी को जी-जान से प्यार करती थी। संयोग से बड़ी रानी *श्योरा देवी* से भी एक पुत्र हो गया। जिसका नाम था *राजा राम राजे* । श्योरा रानी अपने पुत्र मोह में इतनी पागल हो गई कि उन्होंने *संभाजी राजे* के साथ षड्यंत्र पर षड़यंत्र किये।इस षड़यंत्र में 🌴प्रधान पंत अन्नाजी 🌴 को भी शामिल किया। शिवाजी भी इस षड़यंत्र को समझकर * *किंकर्तव्यविमूढ़* हो गये चाहकर भी कुछ न कर सके।आगे जाकर इसी षड़यंत्र के चलते संभाजी राजे औरंगजेब के हाथों लग गये और एक *अप्रतिम योद्धा* हमने खो दिया।
(२) यदि पृथ्वी राज चौहान ने *जयचंद की बेटी संयोगिता* का बलपूर्वक अपरहण नहीं किया होता तो शायद *नमक हराम जयचंद* गोरी से मिलकर पृथ्वीराज चौहान के साथ विश्वासघात नहीं करता और आज भारत का इतिहास कुछ और होता।
यही बात पंचवटी में भगवान राम ने *काम रोग से पीड़ित शूर्पणखा* को कही कि मेरे साथ मेरी *अर्धांगिनी देवी सीता* है मैं वो गल्ती नहीं दोहराऊंगा जो हमारे पिताश्री महाराज ने की। हमारा वैदिक दर्शन कहता है *एक नारी ब्रह्मचारी*।
🏵️ क्रीळन्तौ पुत्रै नप्तृभि 🏵️
मंत्र का यह भाग बहुत ही उत्कृष्ट है। अर्थात् अपने परिवार के साथ ही खेल -कूद करो।किसी *पार्क या क्लब* में नहीं। जो माता-पिता बच्चों के साथ खेलना नहीं जानते उनके बच्चे उच्च भावनाओं को नहीं प्राप्त होते। यदि आपके बच्चे आपसे डरते हैं तो समझ लीजिए कि आपकी। *गृहस्थ अवस्था* में कोई त्रुटी है। जिन अमीरों या राजाओं के बच्चे सदैव नौकरों के साथ रहते हैं वे अधिकतर *द्वेष आदि मानसिक विकलांगता* के शिकार हुए हैं आगे चलकर माता-पिता की भी उपेक्षा किए हैं। जैसे *औरंगजेब और खिल्ली* इत्यादि। माता पिता के अंदर संतान के लिए नैसर्गिक प्रेम होता है जिसकी अनदेखी माता पिता को नहीं करनी चाहिए।
तुलसीदास जी ने एकबार एक पंक्ति का दोहा लिखकर रख दिया।
*सुरतिय,नरतिय,नागतिय कष्ट कहें सब कोय*
जब रहीमदास ने इसको पढ़ा तो दोहा को पूरा करते हुए कहा कि …
*गर्भ लिए हुलसी फिरैं तुलसी सों सुत होय।*
इस प्रकार *एक नारी। सदाचारी* की इस वैदिक विज्ञान को जन जन तक पहुंचाने के लिए हमारे *प्रियवर आदरणीय विनोद उपाध्याय* पत्रकार क्लब अध्यक्ष बस्ती ने अपने समाचार पत्र 🦜 *अनुराग लक्ष्य 🦜* से माध्यम से 📚 ईश्वरीय वाणी वेद 📚 को जन जन तक पहुंचाने का काम किया है। इसके साथ ही समय -समय पर *पत्रकार विनोद शास्त्री आर्य समाज मंदिर गोंडा* भी 📚 ईश्वरीय वाणी वेद 📚 को प्रकाशित करते रहते हैं।इन दोनों *आर्य पत्रकारों* के यशस्वी जीवन की कामना करता हूं।
आचार्य सुरेश जोशी
🪷 वैदिक प्रवक्ता 🪷
आर्यावर्त साधना सदन पटेल नगर दशहराबाग बाराबंकी उत्तर प्रदेश ☎️ 7985414636☎️
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