बस्ती 24 मई 2024। भगवान विष्णु के परम भक्त, ब्रम्हा जी के मानस पुत्र महर्षि नारद जी की जयन्ती कार्यालय में मनायी गयी। महर्षि नारद के चित्र पर माल्यार्पण के बाद नारद चर्चा के सम्पादक विनोद उपाध्याय ने कहा कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति में नारद जी का विशिष्ट स्थान है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार देवर्षि नारद को सृष्टि का पहला पत्रकार कहा जाता था. उनको यह वरदान था कि वह तीनों लोकों का भ्रमण कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है था कि पौराणिक काल में देवर्षि नारद पूरे ब्रह्मांड में घूमते थे और देवी-देवताओं के आदेश दैत्यों और गुरुओं तक पहुंचाते थे. वे श्री हरि के परम भक्त थे और उनकी आराधना में विलीन रहते थे। देवर्षि नारद धर्म के प्रचार तथा लोक-कल्याण हेतु सदैव प्रयत्नशील रहते हैं। शास्त्रों में इन्हें भगवान का मन कहा गया है। इसी कारण सभी युगों में, सभी लोकों में, समस्त विद्याओं में, समाज के सभी वर्गो में नारद जी का सदा से एक महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। आज के दिन महर्षि नारद के विचारों को अनुसरण करने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर राकेश तिवारी, सर्वेश श्रीवास्तव, स्कन्द शुक्ल, अरूण कुमार, महेन्द्र तिवारी, अनुराग श्रीवास्तव, वशिष्ठ नारायण पाण्डेय, राजेन्द्र उपाध्याय, लवकुश सिंह, संदीप शुक्ल, कौशल ओझा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
पौराणिक कथाओं के अनुसार देवर्षि नारद को सृष्टि का पहला पत्रकार कहा जाता था. उनको यह वरदान था कि वह तीनों लोकों का भ्रमण कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है था कि पौराणिक काल में देवर्षि नारद पूरे ब्रह्मांड में घूमते थे और देवी-देवताओं के आदेश दैत्यों और गुरुओं तक पहुंचाते थे. वे श्री हरि के परम भक्त थे और उनकी आराधना में विलीन रहते थे। देवर्षि नारद धर्म के प्रचार तथा लोक-कल्याण हेतु सदैव प्रयत्नशील रहते हैं। शास्त्रों में इन्हें भगवान का मन कहा गया है। इसी कारण सभी युगों में, सभी लोकों में, समस्त विद्याओं में, समाज के सभी वर्गो में नारद जी का सदा से एक महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। आज के दिन महर्षि नारद के विचारों को अनुसरण करने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर राकेश तिवारी, सर्वेश श्रीवास्तव, स्कन्द शुक्ल, अरूण कुमार, महेन्द्र तिवारी, अनुराग श्रीवास्तव, वशिष्ठ नारायण पाण्डेय, राजेन्द्र उपाध्याय, लवकुश सिंह, संदीप शुक्ल, कौशल ओझा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
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