दुनिया में लाए थे – अंजना सिन्हा

दुनिया में लाए थे बाबा,किस्मत भी तुम दे जाते।

रूठ गया है भाग्य हमारा,ख़ुशियांँ लेकर तुम आते।।

याद हमें हैं बचपन के दिन,मुझे सँभाला करते थे।

उलझन मेरी पल में सुलझा,कष्ट निवारा करते थे।।

साया बनकर साथ चले थे,बाबा पल वो फिर भाते…

दुनिया में लाए थे बाबा,किस्मत भी तुम दे जाते।।

लिखती पाती आज तुम्हें हूंँ,मन की सारी ही बातें।

छोड़ गए हो तन्हा मुझको,कटें न दिन सुख से रातें।।

अश्क भरे अब तो नयनों में,जग देता केवल घातें…

दुनिया में लाए थे बाबा,किस्मत भी तुम दे जाते।।

रो रो तुमने विदा किया था,कहते थे तुम हो रानी।

शूल भरी है राहें अपनी,जो लगती हैं बेगानी।।

छोड़ गए हो कौन सुने अब,मेरे इस मन की बातें…

दुनिया में लाए थे बाबा,किस्मत भी तुम दे जाते।।

पढ़ा लिखा कर बड़ा किया था,

संस्कार मुझमें पाले।

करूंँ शिकायत क्या इस जग की,

मुझे चुभोए जो भाले।।

छोड़ गए क्यों मुझे अकेले,काश कभी मिलने आते…

दुनिया में लाए थे बाबा,किस्मत भी तुम दे जाते।।

अंजना सिन्हा “सखी ”

रायगढ़

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