सिलाई कटाई और रेडीमेड गारमेंट प्राप्त 56 महिला प्रशिक्षुओं को मिला प्रमाणपत्र,खिले चेहरे

बस्ती: मुंबई की संस्था अक्षय शक्ति वेलफेयर एसोसियेशन द्वारा युवा विकास समिति के स्थानीय संयोजन में विकास खंड बनकटी के ग्राम पंचायत थरौली के बोकनार में अक्षयधागा स्किल सेंटर प्रोजेक्ट के तहत संचालित किये जा रहे सिलाई कटाई और रेडीमेड गारमेंट प्राप्त 56 महिला प्रशिक्षुओं को को शनिवार को प्रमाण-पत्र का वितरण किया गया। प्रमाण-पत्र का वितरण अक्षय शक्ति टीम मुम्बई से आये मिनी सुबोध, इंदिरा चंद्रशेखरन, डॉ. नारायण अय्यर, विद्या डिडवानिया, उषा पणिक्कर के हाथों किया गया।

मौके पर अपने संबोधन में मिनी सुबोध ने कहा कि मिशन वन मिलियन के तहत देश भर से दस लाख महिलाओं को विभिन्न तरह के स्किल ट्रेनिंग प्रदान किये जाने की दिशा में किये जा रहे प्रयास के तहत आईक्यूवीआईए के सहयोग से बस्ती के अक्षय धागा स्किल सेंटर पर पहले बैच के सफल प्रशिक्षुओं को प्रदान किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण युवतियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और नए फैशनेबल सिलाई-कढ़ाई के गुर सिखाना है। ताकि ये लोग अपने परिवार का भरण-पोषण कर सके। साथ ही समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सके।

डॉ. नारायण अय्यर नें कहा कि इस तरह के ट्रेनिंग से महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण सोपान जुड़ता है। जिससे असमानता को समाप्त करने में सहायता मिलती है। उन्होंने सभी प्रशिक्षित महिलाओं को उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की। विद्या डिडवानिया ने अपने संबोधन में कहा कि संस्था आगे भी इस दिशा में कार्य करती रहेगी ताकि महिलाएं स्वावलंबी बन सके। इंदिरा चंद्रशेखरन नें कहा किइस ट्रेनिंग में ऐसे कपड़ों को सिलना सिखाया गया जिसकी फैशन इंडस्ट्री में ज्यादा मांग है। उषा पणिक्कर नें बताया की इस ट्रेनिंग के दौरान  रेडीमेड में महिलाओं और पुरुषों के कपड़ो की कटिंग, सिलना सिखाया गया. इसके बाद कपड़े के पर्स, बैग के अलावा अन्य कपड़े से निर्मित आयटम बनाना भी सिखाया गया। इस मौके पर संस्था युवा विकास समिति के सचिव बृहस्पति कुमार पाण्डेय नें सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी महिलाओं और लडकियों के उज्जवल भविष्य की कामना की। इस दौरान माधुरी, सुनीता यादव, रत्ना, राधना सहित प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली समस्त लड़कियां और महिलाएं मौजूद रहीं थीं।

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