मतदान है लोकतंत्र का यह पर्व महान।
आओ सब मिल करें मतदान।।
अपना अधिकार जानों तुम,
है अपना फ़र्ज़ निभाओ तुम।
मतदान करो, देश हित चुनो,
अपना कर्तव्य निभाओ तुम।।
जन–जन को यह बतलाना,
लोकतंत्र मजबूत बनाना है।
हम सबने मिल यह ठाना है,
भारत को सौराष्ट्र बनाना है।।
नहीं यह सबकी मजबूरी है,
क्यों यह मतदान जरूरी है?
अब सबको यह बतलाना है,
हमें मताधिकार बचाना है।।
जिसके लिए राष्ट्रहित ही सर्वोपरि हो,
जो भेद-भाव,ऊंच-नीच से ऊपर हो।
तुमको अधिकार यही देश भक्त चुनो,
हो रक्षक देश का,बागडोर उन्हीं हाथों में हो।।
महिलाओं को अधिकार,बुजुर्गों को सम्मान मिले,
जो हैं देश का भविष्य,युवाओं को उड़ान मिले।
नारी को इज़्जत, सम्मान किशोरियाँ हों सुरक्षित,
ऐसा अपना सुसंगठित,विकसित भारत राष्ट्र बनें।।
प्रीती द्विवेदी (प्रीती देवी)
चित्रकूट, उत्तर प्रदेश
स्वलिखित मौलिक रचना