महाभारत काल के पहले पूरा विश्व आर्य था -आचार्य सुरेश जोशी

🏹🏹 ओ३म् 🏹🏹
🕉️ श्री -राम नवमी पर्व 🕉️
आज श्री राम नवमी के पावन पर्व पर 🍁 मातु श्री सरोज द्विवेदी 🍁 के पावन गृह दशहराबाग पटेल नगर बाराबंकी में निम्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।
[१] वैदिक अग्निहोत्र।
[२] मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम चंद्र जी
महाराज के 🌿 पावन चरित्र 🌿
का वर्णन किया गया।
पूरे देश में चल रहे नवरात्र व्रत का समापन श्री राम नवमी पर संपन्न हुआ।
मानव का सबसे शत्रु है 🌾 अविद्या🌾 अर्थात् सही ज्ञान का न होना। लगभग महाभारत काल के बाद हिंदू जाति अधंविश्वास, पाखंड, जातिवाद, मूर्ति पूजा के चलते अपने संपूर्ण विराट अस्तित्व को भूल चुकी है। बड़े-बड़े पंडित, राजनेता अधंकार में इतने लिप्त हैं कि गलत ज्ञान को सही बताने का दंभ कर रहे हैं जिससे हिंदू आज अल्पसंख्यक होने के कामगार पर है।यही हाल चलता रहा तो ४०० सीटें हासिल करने के बाद भी हिन्दू राष्ट्र बन नहीं सकेगा यदि बन भी गया तो कुछ ही दिन में बिखर जायेगा। क्योंकि 🌸 जनक्रांति के चलते कोई भी राजनीति 🌸 हो वो फेल हो जाती है।
इसका एक मात्र उपाय है कि हिंदु अपना 🌼 आत्म-निरीक्षण 🌼करें और महाभारत के पहले के हिंदू और महाभारत के बाद के हिंदू में फ़र्क करना समझें।
महाभारत काल के पहले पूरा विश्व हिन्दू (आर्य) था।तब कोई जाति वाद नहीं था।ऊंच -नीच की भावना नहीं थी। कोई हिन्दू,मुसलमान, ईसाई नहीं था। यहूदी,सिख,जैन,बौद्धिष्ठ,पारसी नहीं था।सभी आर्य (हिंदू) थे। ऐसे ही समय में रामराज्य की सही परिभाषा चरित्रार्थ होती थी।
महाभारत के बाद देश में मुसलमान, ईसाई, बौद्ध,जैन, पारसी कहां से आये?क्या बाहर से?बाहर से कुछ ही संख्या में आये।शेष सब हिन्दू ने ही धर्म परिवर्तन किया।उसका कारण केवल 🌸 जातिवाद 🌸 अंधविश्वास 🌸 मूर्ति पूजा 🌸 छुआ-छूत रहा।आज भी यही हो रहा है। ऐसे में हिंदू राष्ट्र बनना असंभव है। यदि कूटनीति के चलते बन भी गया तो टिक नहीं पायेगा। क्योंकि 🌴 समान शिक्षा 🌴 समान नागरिक संहिता 🌴 समान आचार संहिता 🌴 के अभाव के चलते व जातिवादी व्यवस्था के कारण हिंदुओं का पलायन रुकेगा असंभव है।
अतः आओ समझे हम 🌻 सत्य सनातन धर्म को 🌻 और छोड़ें तथाकथित महाभारत काल के बाद के हिंदू व्यवस्था को। हिंदुओं में बड़ती अविद्या के कुछ उदाहरण।
🏵️🏵️ व्रत क्या है?🏵️🏵️
व्रत का अर्थ लोग भूखा रहना समझते हैं।यह मान्यता शास्त्र के विपरीत है।व्रत का अर्थ होता है कि पवित्र लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपनी शक्ति, सामर्थ्य का बलिदान करना। भगवान राम ने 🪷व्रत🪷 किया कि मैं आर्यावर्त देश से असुरों का सर्वनाश कर दूंगा और इसके लिए उन्होंने राजगद्दी को त्यागा।१४ वर्ष के बनवास को स्वीकार किया। वानर,कील,किरात,भिलनी,केवट, निषादों का संगठन बनाकर रक्षा संस्कृति के सेनापति दशानन का सर्वनाश करके पुनः अयोध्या से लंका तक मानव धर्म की स्थापना करके अपने व्रत को सफल किया।इसका नाम है व्रत!
🌹 उपवास को व्रत कहना भ्रांति🌹
मगर आज लोगों ने शास्त्रों का अध्ययन करना छोड़ दिया है। तथाकथित कथावाचकों के गलत ज्ञान को ही धर्म समझ लिया है। उपवास को ही व्रत समझ लिया है।वह भी उपवास यानि भूखा रहना ।
🧘 उपवास का शास्त्रीय अर्थ 🧘
उपवास यानि 🍁 उप सामीप्ये परमात्मनि 🍁 अर्थात् जब कभी उदर विकार हो। अपच हो।पेट में गैस बनने लगे। बदहजमी हो।उस समय अन्न को छोड़कर कर परमात्मा का चिंतन करें।इसका मतलब मन को अन्न के चिंतन से हटाकर परमात्मा के चिंतन में लगायें। जिससे पेट की मशीन को आराम मिले और मन ईश्वर के चिंतन में लगा रहे तो व्यक्ति को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ हो।
मगर देखने में यह आता है कि लोग इस उपवास में भी खुद को धोखा ही देते हैं। रोटी,चावल, सब्जी छोड़कर मखाने,उबले आलू,केला,सेव आदि खाकर पेट भी भर लेते हैं और कहते हैं आज मेरा व्रत है।सत्यता यह है कि ये लोग 🌻 न ही व्रत करते हैं और न ही उपवास 🌻 इस प्रकार के आचरण से आत्मा का पतन ही होता है।
🌿 उपवास हानिकर है 🌿
महर्षि मनु महाराज कहते हैं कि तीन लोगों को कभी भी उपवास अर्थात् अन्न नहीं छोड़ना चाहिए।
[१] गर्भवती महिला। इससे गर्भ में पल रहे शिशु का विकास रुक जाता है परिणाम स्वरूप बच्चे विकलांग या मंद बुद्धि होते हैं। जब गर्भवती महिला भोजन नहीं करेगी जो शिशु भी भोजन नहीं पाता क्योंकि की गर्भ में शिशु मां के आहार नाल से ही भोजन पाता है।
[२] पढ़ने वाले विद्यार्थियों को व्रत तो करना चाहिए मगर भूखा रहने वाला उपवास नहीं करना चाहिए।भूखे रहने से बुद्धि का विकास रुक जाता है।
[३] जिन स्त्री/पुरुषों की आयु ६० वर्ष की हो जाए उन्हें भी उपवास नहीं करना चाहिए। अन्यथा शारीरिक कमजोर के लिए मूर्छा आदि आ सकती है।
🌼आओ व्रत करें रामनवमी पर 🌼
यदि आप श्रीराम जी के सच्चे भक्त हैं तो आज के दिन कुछ व्रत करें जिससे भगवान राम आपसे प्रसन्न रहें।
(१) आप व्रत लें कि अपने बालक/
बालिकाओं को वैदिक गुरुकुल में
पढ़ने भेजेंगे।
(२) आप व्रत लें कि श्री राम की तरह
आप भी रोज बिना यज्ञ किए
भोजन नहीं करेंगे।
(३) आप व्रत लें कि भगवान राम रोज
चार बजे उठते थे मैं भी चार बजे
उठ जाऊंगा।
(४) आप व्रत लें कि श्री राम प्रतिदिन
प्रातः काल उठकर अपने माता-पिता आचार्य को नमस्ते करते थे मैं भी करुंगा।
[५] आप व्रत लें कि श्रीराम की तरह मैं
भी जातिवाद,ऊंच -नीच का भेदभाव न करके हिंदुओं की संख्या
बढ़ाकर देश भक्त बनुंगा।
🌲आज के यजमान 🌲
[१] मातुश्री सरोज द्विवेदी।
[२] देवेन्द्र द्विवेदी जी।
[३] श्रीमती कविता द्विवेदी।
[४] रजनीकांत द्विवेदी जी।
[५] श्रीमती सुष्मिता द्विवेदी जी।
[६] ब्रह्मचारी विनय द्विवेदी।
संपूर्ण परिवार ने बड़े ही हर्षोल्लास के साथ 🏹 श्री राम नवमी 🏹 के पावन पर्व मनाया व श्रीराम का पावन चरित्र श्रवण कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
🌸 पारिवारिक सत्संग केंद्र 🌸
आचार्य सुरेश जोशी
एवं
पंडिता रुक्मिणी देवी
आर्यावर्त साधना सदन पटेल नगर दशहराबाग बाराबंकी उत्तर प्रदेश ☎️ 7985414636☎️

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