नई गीत प्रस्तुत -अंजना सिन्हा “सखी “

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जिस्म से रूह को निकाल के,पूछ रहे क्या हाल हैं।

दूर तलक ये ग़म के साए,जिंदगी भी कमाल हैं।।

 

टूट गया है मन का दर्पण,टूट गई हर आस है।

खुशी रेत सी फ़िसल गई अब,रही न कोई पास है।।

तुमने हमको भुला दिया ये,सोच सोच बेहाल हैं..

जिस्म से रूह को निकाल के,पूछ रहे क्या हाल हैं।

 

याद तुम्हारी हमें सताए,तुम्हीं थे पिया सहारे।

उठे टीस सी दिल में सजना,आज भी पंथ निहारे।।

छोड़ दिया क्यों तुमने हमको,मन में यही सवाल हैं…

जिस्म से रूह को निकाल के,पूछ रहे क्या हाल हैं।।

 

हृदय हमारा पल पल रोता,समझ न पाए पीर को।

याद तुम्हें कर बहे नैन से,किसे दिखाएँ नीर को।।

तड़प रहे जल बिन मछली से,

गुज़रे कितने साल हैं…

जिस्म से रूह को निकल के,पूछ रहे क्या हाल हैं।।

 

कोई डगर न सूझे मुझको,जीवन में बस प्यास है।

जीवन माया छोड़ चलें यह,हमें न आई रास है।।

ले चल कान्हा शरण तिहारी,जग में माया जाल हैं..

जिस्म से रूह को निकाल के,पूछ रहे क्या हाल हैं।।

 

अंजना सिन्हा “सखी “

रायगढ़

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