आओ जी अब सजना मेरे दोनों खेले होली

आओ जी अब सजना मेरे दोनों खेले होली।

रंग लगा दे अंग अंग सजना, प्रेम रंग मिठ बोली।।

 

रंग बिरंगी निस दिन सजना ,देखूंँ मैं तो सपने।

भीग रहा है तन मन मेरा, तुम हो मेरे मन में।।

इतना रंग लगाना मुझको, भीगे लहंगा चोली

आओ जी अब सजना मेरे दोनों खेले होली।।

 

रंगों की इस में महफिल में अब भूलें बीती बातें।

भाव प्रेम हो अब तो सब में ,अमन चैन की रातें।।

मिलकर खेले रंग सभी अब देखो करे ठिठोली

आओ जी अब सजना मेरे ,आओ खेले होली।।

 

रहे दुखी मत कोई अब तो, आओ खेलें ऐसा।

प्रेम बढाये समझे साथी, सबको अपने जैसा।।

देखो सखियों की है निकली अब तो ऐसी टोली

आओ जी अब सजना मेरे, दोनों खेले होली।।

 

अंजना सिन्हा “सखी ”

रायगढ़

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