नई गीत होली पर

खिलेंं जब फूल गुलशन में समझ लेना कि होली है।
उड़े जब फाग फागुन में समझ लेना कि होली है।
पिया आये, नहीं आये ख़बर कोई नहीं आई।
नयन गीले, झरे सावन, समझ लेना कि होली है।
वो टेसू की महक, कचनार की, खुशबू फ़िज़ाओं में।
करे विचलित सनम तन -मन समझ लेना कि होली है।
लगीं पकने, निबोरी, आम बौराने लगे हैं जब।
बने निद्रा सनम बैरन समझ लेना कि होली है।
शबे ग़म तान छेड़े मुस्कुराता चांद फिर देखो।
हटाए चांदनी चिलमन समझ लेना कि होली है।
महकती और चहकती तेज चलती जब हो पुरवाई।
लरजते लव करें क्रंदन समझ लेना की होली है।

अंजना सिन्हा “सखी ”
रायगढ़

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