काम, क्रोध, मद, लोभ सब त्यागकर आगे बढ़ो।
इनसे, उनसे, जिनसे भी हो मनमुटाव त्यागकर आगे बढ़ो।
रंगो की ऋतु आई है रंग दो प्रेम से रिश्तों को..
दहन करो उफ, शायद, काश संकोच त्यागकर आगे बढ़ो।।
होलिका
सुप्रभात मित्रों
आप सभी देश वासियों को होलिका दहन की शुभकामनाएं
अंकिता तिवारी
कवयित्री अयोध्या राष्ट्रीय कवि संगम