हमें प्यार करना सिखाती है होली-सुरेन्द्र सिंह ‘अहम’ 

ग़ज़ल

सभी को गले से लगाती है होली
हमें प्यार करना सिखाती है होली

दहन होलिका का ज़रूरी है पहले
तभी रंग में फिर नहाती है होली

न पिचकारियों का अगर ज़िक्र हो तो
अचानक बहुत रूठ जाती है होली

ये फागुन में सब जान जाएंगे तय है
कि हुड़दंग कितना मचाती है होली

किसी के भी मज़हब से नफ़रत न करना
सभी को सबक ये सिखाती है होली

बग़ावत किसी की न त्यौहार से हो
ग़नीमत बहुत फिर जताती है होली

न जाने ‘ अहम’ साल भर में ये क्यूं कर
फ़कत एक ही बार आती है होली

सुरेन्द्र सिंह ‘अहम’ 

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