अनुराग लक्ष्य, 5 मार्च
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुम्बई संवाददाता ।
,,, मेरे बुजुर्गो के सर की पगड़ी जो हो सके तो बचाए रखना
दिलों में उनकी नसीहतों के जो फूल हैं वोह खिलाए रखना।
यह वक्त ऐसा ही आ गया है कि फिक्र करने की है ज़रूरत
किसी भी सूरत में अपने घर को मुहब्बतों से सजाए रखना,, ।।
जी हां, हमें यही दर्स सदियों से बुजुर्गों, वालियों और खानकाहों की दहलीज से मिलता आ रहा है। जिसकी हमें मुहाफिजत भी करनी है। ताकि अल्लाह के वालियों के शान दुनिया में ऐसे ही कायम ओ दायेम रहे। और आवाम ऐसे ही उनके दर से उनका फैज़ान हासिल करती रहे।
बीती रात धारावी की कब्रस्तान ताड़वाडी रोशनी से जगमगा उठी। मौका था कब्रस्तान के बीच में इस्थित हज़रत ए इब्राहीम शाह कादरी का 247 वां उर्स मुबारक, जहां जायरीनों का हुजूम देखने को मिला। देर रात तक अकीदत मंदों ने दुरुद ओ सलाम के नज़राने पेश किए। साथ ही अपनी कामयाबी, भलाई और मुल्क की खुशहाली के लिए दुआएं मांगी ।
इस अवसर पर दरगाह कमेटी की जानिब से जायरीनों के इस्तेकबाल में कोई कसर नहीं छोड़ी। देर रात तक अकीदत मंदों की भीड़ ताड़वाडी कब्रस्तान की रौनक को बरकरार रखा। आयोजन समिति भी अपने फराएज को बेहतर अंजाम देती हुई दिखाई दी, जो सराहनीय कदम है।