बस्ती – लाल जोड़े की होती तो क्या बात थी,
मगर लाल तो सिर्फ अस्तित्व भी है, (सृजन)
लाल में ही सृजन भी है, (महावारी) लाल से ही लाल भी है, (जन्म)
लाल अपनी संस्कृति भी है,
लाल ही अपना पूरा संसार है,
लाल ही इश्क भी है,
लाल ही पहचान भी है,
पृथ्वी पर सुबह और शाम भी, लाली से ही जीवन है (सूर्य)
लाल माथे की तिलक भी है,
लाल हाथों में खन-खन भी है,
रूह के नब्ज में ही लाल ही लाल,
लाल ही सर्वाधिक दृश्य है,
लाल ही रक्षा भी है,
लाल गधा तो खतरा भी है,
ज्योति पुंज की गहराई भी लाल है,
लाल ही में हूं लाल में ही सब है l
लेखक
महिमा सिंह