अनुराग लक्ष्य, 10 जुलाई
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
बनारस का नाम आते गीत और संगीत दिल ओ दिमाग में अपना सुरूर पैदा करना शुरू कर देते हैं।
बनारस की सरज़मीन गीत और संगीत को लेकर अपने आप में एक मिसाल हैं। जहाँ से पूरी दुनिया में संदेश गया है।
उसी गंगा जमुनी तहज़ीब के शहर बनारस से एक ऐसे संजीदा शायर हैं, दुनिया ए अदब जिन्हें मोहतरम वासिफ बनारसी के नाम से जानती और पहचानती है। मैं सलीम बस्तवी अज़ीज़ी आज उन्हीं की एक ग़ज़ल से आपको रूबरू करा रहा हूँ।
1/ मेरी इन आंखों से इक पल तेरा ओझल होना,
फिर तो यह तय है समझ ले मेरा पागल होना ।
2 / चाहता हूँ कि तेरी आंखों में बस जाऊं मैं,
खुशनसीबी है तेरी आंखों का काजल होना ।
3/ होंगे बर्बाद वोह जो काम बुरा करते हैं,
हमने देखा है किसी शहर को जंगल होना ।
4/ नेक इंसान बनो मेहनत से कमाओ पैसा,
अच्छा लगता है मुझे टाट से मखमल होना ।
5/ छोड़ कर दामन ए उल्फ़त तेरा कैसे जीता,
कौन कुंदन से भला चाहेगा पीतल होना ।
6 / अहल ए गुलशन को खटकती है हमारी खुशबू,
राह का काँटा बना है मेरा संदल होना ।
7/ तीर मिज़गा से जरा सीन ए वासिफ पे चला,
शौक़ है मुझको तेरे इश्क़ में घायल होना ।
पेशकश,,,,,, सलीम बस्तवी अज़ीज़ी